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Showing posts from May, 2021

नास्तिक

नास्तिक Sonu Mandawariya मित्र मेरी पोस्ट तो देखते होगे ! मेरे से आंबेडकरवादी भी परेशान रहते हैं, बौधिष्ट भी, सनातनी और आर्यसमाजी हिन्दू भी, वे समझ ही नही पाते हैं कि यह ऊँट किस करवट बैठेगा और यह ऊँट किस धर्म का है ? नास्तिक वह है जो ठोक-बजाकर देखता है जो सत्य लगता है स्वीकार करता है अन्यथा त्याग देता है! किसी राजनीतिक गुटबाजी में नहीं पड़ता है! Sunder Lal Sagar मित्र पञ्च तत्व की बात पर ही अटके हो ? छठे तत्व की बात क्यों नही करते जिस पर सम्पूर्ण ज्योतिष विज्ञान (खगोल विज्ञान : ग्रहों की पारस्परिक गति और रेडीएशन ) चलता है ! बुद्ध तो केवल चार तत्वों की ही बात करते हैं क्योकि पञ्च इन्द्रीय बाले पांचवे और छठवे तत्व की अनुभूति ही नहीं कर सकते हैं इसलिए वह इस विषय को केवल श्रोतापन्न(भंगी), सक्दागामी, अनागामी के साथ ही चर्चा करते हैं! अरहंत तो इस चर्चा से भी मुक्त होता है! मैंने तो भगवान की बात की है जो शास्वत और शाब्दिक है अकाट्य-सत्य है जो इसे स्वीकार न करे वह नाबालिग है बुद्धि हीन है!

कौन है भंगी ?

कौन है भंगी ? भंगी शब्द का शाब्दिक अर्थ सफाई करने बाला/या गन्दा रहने बाला कैसे हो गया मेरी समझ नहीं आता है? भंग से भंगी शब्द बना है अर्थात भंग को प्राप्त साधक, भंग साधना की वह अवस्था है जिसमें साधक को अपने शरीर की सूक्ष्म कोशिकाओ की हरकतों का बोध होने लगता है इस अवस्था को भंग कहा जाता है जो साधक इस अवस्था को प्राप्त कर लेता है वही भंगी है! जो भंगी है वह मानसिक विकारो से विमुक्त (चित्त-विशुद्धि अर्थत राग, दोष और मोह से) हो जाता है बुद्ध दर्शन में इस अवस्था को श्रोतापन्न (भंगी) अवस्था कहा जाता है यह साधना का प्रथम फल है! मैं तो यही कहूँगा कि ब्राह्मण, ब्राह्मण न रहा, और भंगी, भंगी न रहा, दोनों पाखंडी हो गये ! मेरी नजर में, भंगी होना बहुत गौरव की बात है ! जाति श्रेष्ठता का दंभ भरना, यह एक ला-इलाज वीमारी है ! बाबा साहब ने इसी का इलाज बताया था "बेटी रोटी का सम्बन्ध" किन्तु उच्च शिक्षित मूर्खो ने मनुवादीयो की बेटियों से शादी करना आरम्भ कर दिया ! जिस दिन भारतीय संविधान ख़त्म करने में वे सफल हो जायेंगे उसी दिन शूद्र वर्ण में एक नयी जाति और जोड़ देंगे जो इन उच्च शिक्षितो की संकर संत...