नास्तिक

नास्तिक Sonu Mandawariya मित्र मेरी पोस्ट तो देखते होगे ! मेरे से आंबेडकरवादी भी परेशान रहते हैं, बौधिष्ट भी, सनातनी और आर्यसमाजी हिन्दू भी, वे समझ ही नही पाते हैं कि यह ऊँट किस करवट बैठेगा और यह ऊँट किस धर्म का है ? नास्तिक वह है जो ठोक-बजाकर देखता है जो सत्य लगता है स्वीकार करता है अन्यथा त्याग देता है! किसी राजनीतिक गुटबाजी में नहीं पड़ता है! Sunder Lal Sagar मित्र पञ्च तत्व की बात पर ही अटके हो ? छठे तत्व की बात क्यों नही करते जिस पर सम्पूर्ण ज्योतिष विज्ञान (खगोल विज्ञान : ग्रहों की पारस्परिक गति और रेडीएशन ) चलता है ! बुद्ध तो केवल चार तत्वों की ही बात करते हैं क्योकि पञ्च इन्द्रीय बाले पांचवे और छठवे तत्व की अनुभूति ही नहीं कर सकते हैं इसलिए वह इस विषय को केवल श्रोतापन्न(भंगी), सक्दागामी, अनागामी के साथ ही चर्चा करते हैं! अरहंत तो इस चर्चा से भी मुक्त होता है! मैंने तो भगवान की बात की है जो शास्वत और शाब्दिक है अकाट्य-सत्य है जो इसे स्वीकार न करे वह नाबालिग है बुद्धि हीन है!

Comments

Popular posts from this blog

चमार मूलत बौद्ध है-ओशो

दलित शब्द का अर्थ

यादवो की मूर्खताएं