ज्योतिष के अनुप्रयोग

ज्योतिष के अनुप्रयोग मित्र, ज्योतिष का शूद्र; जाति आधारित नही होता बल्कि जन्म आधारित होता है अर्थात शूद्रो की किसी जाति में जन्मा व्यक्ति जन्म लग्न के अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य गुण वाला भी हो सकता है! जैसे जन्म लग्न के अनुसार बाबा साहब और मायावती ब्राह्मण लग्न के हैं जबकि योगी आदित्यनाथ शूद्र लग्न का है! जन्म लग्न व्यक्ति के संभावित लक्षणों को दर्शाता है! अगर ध्यान से देखोगे तो पाओगे आदित्यनाथ के लक्षण शूद्र अर्थात राक्षसीय हैं जबकि मायावती और बाबा साहब के लक्षण ब्राहमण के हैं; किन्तु जाति के शूद्र इस विद्या को नही जानते हैं इसलिए जाति के ब्राह्मण वैश्य और क्षत्रिय उनका शोषण कर लेते हैं! इस विद्या को जानो यह प्रेक्षण पर आधारित है और भविष्य की संभावनाओ की घोषणा करता है! इसका भगवान से कोई लेना-देना नही है सीधा-सीधा वैज्ञानिक प्रेक्षणों के निष्कर्षो पर आधारित हैं! मिथुन तुला और कुम्भ लग्न वाले शूद्र होते हैं; वृषभ, कन्या और मकर लग्न वाले वैश्य; मेष, सिंह और धनु लग्न वाले क्षत्रिय तथा कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वाले ब्राह्मण लग्न वाले होते हैं! यह १२ लग्न राशियों के सामने से पृथ्वी घूमती रहती है और पृथ्वी का जो प्रष्ठ जिस लग्न राशी के सामने होता है वह लग्न राशी मानी जाती है उस क्षेत्र विशेष में उस समय जन्मे सभी बच्चे समान लग्न राशी वाले होते हैं! चाहें वे किसी भी जाति की स्त्री के पेट से जन्मे क्यों न हों! ब्राह्मणों(सवर्णों) ने अपने परिवार में जन्मे शूद्र लग्न के बच्चे को भी ब्राह्मण(सवर्ण) उद्द्वोधन कराने के लिए ब्राह्मण(सवर्ण) नाम से जातियों की रचना कर डाली अनजान शूद्रजाति के व्यक्ति ज्योतिष से घ्राण करने लगे और इस बहुमूल्य विद्या से दूर हो गए! इस विद्या का जानकर व्यक्ति अपने बच्चे के कैरियर के निर्माण में विशेष सहयोग दे सकता है! अन्यथा बच्चो और अभिभावक के बीच तनाव बना रहेगा! बुधिष्ट इसको नही मानते : भगवान बुद्ध ने ज्योतिष को अहमियत नही दी है कयोंकि ध्यान-साधन से जुड़ा व्यक्ति लग्न राशियों के प्रभाव को बदलने में सक्षम होता है! वह मन पर नियंत्रण कर शरीर का भेदन करता है और गृह-नक्षत्रों के प्रभाव को नष्ट कर देता है! इस प्रकार बुद्ध का शिष्य केवल ब्राह्मण होता है (आप उस शिष्य को किसी और नाम से भी पुकार सकते हो कोई फर्क नही पड़ता है) अरहंत होता है!

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