मूढ़ता पूर्ण प्रश्न
Vinod Kumar मित्र आप फिर पोथी में पड़ गये ! क्यों 17 के चक्कर में पड़े हो, प्यास बुझाने के लिए एक बोतल पानी काफी है! अब अशोक किस कंपनी के पानी की बोतल प्रयोग करते थे इससे क्या फर्क पड़ता है ! वे पीते तो पानी ही थे अर्थात साधन की पद्दति का ही प्रयोग करते थे जो मोग्लिपुत्त सिखाते थे, जैसे आज भी किसी विश्व-विद्यालय में एक विषय के दर्जनों अध्यापको होते हैं और कई विश्विद्याल मिला दिए जाये तो सैकड़ो अध्यापक हो जाते हैं ! इससे क्या फर्क पड़ता है ? उस विषय का ज्ञान बदल तो नहीं जाता मेरे भाई ! फिर आप मूढ़ पंडितो के प्रश्नों में उलझ गए !
Vinod Kumar अंतर करना तो पंडितो का काम है, उनसे करा लो वे बौद्धों में भी जातियां बना देंगे ! आप पर भी मनुवादियों की संगत का असर आने लगा है, आप भी बिना अंतर किये स्वीकार ही नहीं कर सकते हैं ! वे बौद्ध शिक्षा के 17 विश्व-विद्यालय थे जिसमें से एक के कुलपति मोग्लिपुत्त थे !
Abhinder Gautam तिपिटक में कहाँ लिखा है भाई? महा-काश्यप को यही भय था कि पंडित अपनी विचारधारा को बुद्ध के मुंह से न कहला दें इसीलिए उन्होंने सम्पूर्ण बुद्ध वाणी का संगायन कराकर संकलित कर दिया था! बुद्ध का विज्ञान बुद्धि (तर्क-वितर्क ) का विज्ञान नही है बल्कि बोधि (अनुभूति) का विज्ञानं है !
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