राजपूत काल के राज :--

 राजपूत काल के राज :--


Santosh Tiwari तिवारी जी इतना गुस्सा करना अच्छी बात नही है क्रोध में बुद्धि शून्य हो जाती है! अब सुनो "वात्सायन काम सूत्र" राजपूत काल का सर्व प्रिय ग्रन्थ था जोकि व्यभिचार के मार्ग राज्य को सुझाता है, राज्य अत्याचारी और दुराचारी हो गया था! जिसमें राजा तालूकेदार और राज्य अधिकारी अन्य समाज की औरतो के साथ विवाह न करके केवल व्यभिचार किया करते थे जिससे बड़े पैमाने पर अवैध संताने उत्त्पन्न हो रही थी उन संतानों में लडकियों को देवदासी बना कर शोषण किया जाता था तो दूसरी ओर पुरुषों को गुलाम बनाकर युद्ध में झोंक दिया जाता था ! इस कारण राजपूत काल की वीर गाथाएं बहुत प्रचलित हैं क्योकि युद्ध करने वाले अधिकांश पुरुष अवैध संतान होती थी, जिनके खान-पान पर राज्य ज्य्यादा खर्च नहीं करता था उसी का परिणाम है कि सेना कमजोर रहती थी! राजपूतो के आतंरिक युद्ध में इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा किन्तु जब मुस्लिमो ने आक्रमण किया तो राजपूतो की यह गुलाम सेना उनका सामना नहीं कर सकी और सम्पूर्ण भारत मुस्लिमो का गुलाम होता चला गया! आरएसएस विद्यालय के बाहर की पुस्तके पढोगे तब बुद्धि खुलेगी अन्यथा यूं ही मंद बुद्धि के बने रहोगे और हिन्दू-हिन्दू कह कर उछालते रहोगे! राजपूत काल की और कहानियां जाननी हो तो बुद्धि के दरवाजे खुले रखना !

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