jatiyan
ब्राह्मणों ने हमारे समाज का राजनितिकरण करके और विभाजन किया हमें राजनीति का सामाजिकरण करना होगा
आजादी के बाद ब्राह्मणों को पता चल गया कि अब देश का कारोबार, राजकाज भारत के संविधान से चलेगा और संविधान की नजर में सभी भारतिय बराबर होंगे
कोई भी गैरबराबरी कि विचारधारा, व्यवहार ,भेदभाव गैरकानूनी होगा, असंवैधानिक होगा।
सबको वोट का अधिकार होगा सभी के वोटों की वैल्यू बराबर होगी
वन मैन, वन वोट वन वैल्यू
अब लोकतंत्र में कानून जनता दवारा चुनें हुए प्रतिनिधि बनाएंगे
इससे हजारों सालों से देश के निति निर्माता, कानून बनाने पर एकाधिकार रखनेवाले, ब्राह्मण निर्मित गैरबराबरी कि समाज सत्ता के मालिक ब्राह्मणों के सामने संकट खडा हो गया।
6743 जातियों में ब्राह्मणों दवारा बांटे गये लोगों को संविधान ने OBC SC ST के रूप में विशेषाधिकार देकर जोड दिया।
यही सामाजिक, संवैधानिक समूह जुड जाते हैं तो ब्राह्मणों का एकाधिकार, ब्राह्मणों का वर्चस्व, गैरबराबरी कि उनकी असामाजिक व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इसके लिए हजारों सालों से शासक वर्ग रहा ब्राह्मण ने 6743 जातियों में बंटे हुए मूलनिवासी बहुजनों का राजनितिकरण करना शुरु किया, ताकि यह संवैधानिक समूहों में जुडकर ताकत भी नहीं बने और राजनीतिक पार्टियों में बांटकर 6743 जातियों पर राज किया जाये।
इससे हमारा समाज टूटा और आपस में ही लड रहा है ब्राह्मण भी यही चाहता है विभाजन ब्राह्मण का हजारों सालों से राजनीतिक हथियार रहा है इससे जाट कांग्रेस का जाट बीजेपी का जाट कामरेड जाट आप का जाट
इसी तरह कुर्मी ,पटेलों को, मराठों को, यादवों को और सभी ओबीसी जातियों, सभी अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को विभाजित किया।
वही कांग्रेस है वही बीजेपी है वही कम्युनिस्ट है वही तृणमूल कांग्रेस है मतलब सभी पार्टियों का मालिक वही है, टिकट देने वाला वहीं है, पक्ष भी वही विपक्ष भी वही है
राजनीतिक पार्टियों का एजेंडा बनाने वाला भी वही और प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया पर कांग्रेस को बीजेपी का और बीजेपी को कांग्रेस का विपक्ष बताने वाला भी वही है
चुनाव में कौन जीतेगा, किसको जनता पसंद नापसंद कर रही है यह बताने वाला भी वही है रूझान दिखाने वाला भी वही है सर्वे करनेवाला भी वही दिखाने वाला भी वही और राज करनेवाला भी वही
ब्राह्मण डिवाइड करने के लिए ही पक्ष और विपक्ष बताता है परंतु सभी पार्टियों में दिखावे के रूप में डिवाइड ब्राह्मण असल मे अपना राज लाने के लिए युनाइट है। ब्राह्मण डिवाइड होता है, अलग अलग राजनीतिक पार्टियों में जाता है, और अपनी गैरबराबरी कि ब्राह्मणी व्यवस्था को मजबूत करता है और वह ताकतवर होता है परंतु मूलनिवासी समाज के लोग डिवाइड होते हैं तो वह कमजोर होते हैं क्योंकि ब्राह्मण अपनी विचारधारा और निश्चित उद्देश्य को लेकर कार्य करते हैं
हमारे लोग विचारधारा विहीन और उदेश्य विहीन केवल संपत्ति, सुख सुविधा और दिखावे के लिए ब्राह्मणों के राजनीतिक दलों में मजदूरी करते हैं, मूलनिवासी समाज की दलाली करते हैं
ब्राह्मण का उदेश्य(शासक बनना) है सत्ता, संपत्ति, सूख सुविधा उसे बोनस में मिलती है
हमारे लोगों को क्या करना चाहिए हमें मूलनिवासी समाज जो कि ब्राह्मणों दवारा राजनितिकरण के कारण विभाजित है, हमें मूलनिवासी समाज में राजनीति का सामाजिकरण करना होगा। सामाजिकरण से हमारे लोग समाज के उद्धार, विकास के लिए विचारधारा आधारित और मूलनिवासी समाज को शासक बनाने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर राजनीति करने के लिए जागरूक करना होगा। मूलनिवासी बहुजन समाज को दलालों की पहचान बतानी होगी।
इससे बहुसंख्यक समाज शासक बनेगा।
तभी मूलनिवासी समाज की गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, बेरोजगारी और सभी समस्याओं का समाधान होगा। शासक वर्ग की कोई समस्या नहीं होती है परंतु गुलाम वर्ग की सभी समस्याएं होती है
आज ब्राह्मण शासक वर्ग है इसलिए उसकी कोई समस्या नहीं है और मूलनिवासी समाज गुलाम है इसलिए उसकी सभी समस्याएं हैं।
इसका असल मतलब है हमारी समस्या गरीबी नहीं है
हम गुलाम हैं इसलिए गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी है
अर्थात हमारी मूल समस्या ब्राह्मणों की गुलामी है
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