किसान आन्दोलन
Gaurav Sarwan मित्र आपकी सोच सात्विक है किन्तु शब्दों के अर्थ देश को बहुत बड़ी क्रांति में झोक देंगे! अगर आप अमीरी-गरीवी को ख़त्म करना चाहते हैं तो शेयर-मार्केट में लगी सम्पूर्ण पूँजी को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर कब्ज़ा करना होगा! जो काम करेगा वही श्रम का सुख भोगेगा, जन्म से कोई लाला नही होगा और ना ही किसी सरकारी अथवा प्राइवेट कंपनी के प्रमुखों का पद जन्म पर आधारित होगा! हर-पद(सरकारी और प्राइवेट) के लिए खुली प्रतियोगिता होगी तथा सबको इच्छित सामान शिक्षा ग्रहण करने का हक़ होगा जिसका सम्पूर्ण खर्च सरकार उठाएगी! हर प्रकार के श्रमिक(अधिकारी-मजदूर व अन्य ) को अनिवार्य शिक्षाकर देना ही होगा! मात्र किसान और श्रमिको के विरोध में कानून बनाकर देश में समानता नहीं लाई जा सकती है!
Gaurav Sarwan
Kamlesh Kumar Mittra ब्रदर आपने पढ़ने में गलती की है मैंने भारत के बाकी के राज्यों के किसान को गरीब नहीं कहा है मैंने यह कहा है कि बाकी के राज्य के लोगों के पास बड़ी जमीने नहीं है आप बात को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे हो और आप चाहते क्या हो भारत में हमेशा असमानता बनी रहे अमीर और ज्यादा अमीर होता जाए और गरीब गरीब ही बना रहे मोदी सरकार के तीनों कृषि बिल भारत के सभी किसानों को समानता का दर्जा देंगे आजादी के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा कृषि सुधार कानून होगा मैं मध्यप्रदेश में रहता हूं और मध्य प्रदेश में कृषि बिल का कोई भी विरोध नहीं है यहां का किसान नया कृषि कानून से बहुत ज्यादा खुश है
Gaurav Sarwan
कृषि कानून का विरोध सिर्फ पंजाब का किसान ही कर रहा है भारत के दूसरे राज्यों का किसान कानून का विरोध नहीं कर रहा है सिर्फ और सिर्फ इसके पीछे राजनीति ही दिख रही है आखिर कब तक भारत की आम जनता अपने मेहनत से दिए हुए टैक्स के पैसों पर किसानों को समर्थन मूल्य मुहैया कराएगी पंजाब का किसान जिसके पास जमीन बहुतायत में है सबसे ज्यादा उन्हीं को घटा है बाकी भारत के दूसरे राज्यों में किसानों के पास इतनी जमीन है ही नहीं इसीलिए तो पंजाब क किसान करोड़पति और भारत के दूसरे राज्यों का किसान रोडपति हो गया है
Kamlesh Kumar Mittra
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Gaurav Sarwan मित्र आपने दो बाते स्वीकार की हैं एक केवल पंजाब का किसान विरोध कर रहा है! दूसरा भारत के अन्य राज्यों का किसान गरीव है वह विरोध नही कर रहा है! मतलब साफ है भारत के दूसरे राज्यों में मंडी व्यवस्था ठीक नही है पंजाब का किसान इस चीज को देख रहा है इसलिए वह अपने राज्य में मंडी व्यवस्था ख़त्म होने देना नही चाहता है! तो प्रश्न उठता है कि भाजपा मंडी व्यवस्था ख़त्म करने पर क्यों तुली है? भारत के अन्य राज्यों के किसानो की दशा सुधारने के लिए पंजाब की तर्ज पर अन्य राज्यों में मंडी व्यवस्था लागु क्यों नही करती है ताकि वहां के किसान भी सशक्त हो सके!
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