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Showing posts from September, 2020

बाबा साहब की हत्या क्यों ----

  बाबा साहब की हत्या क्यों ---- जैन जी, चाय की टेबल पर कोई इतना झूठ तो नही बोलेगा ! बात में कुछ तो सच्चाई है ! गुर्जर खुद को हिन्दू कहलाना पसंद नहीं करते! जाटो के बारे में अभी मैं कुछ नही कह सकता हूँ! वैसे भारत में हिन्दू नाम का कभी कोई धर्म नही रहा है! दयानंद सरस्वती ने इस शब्द का विरोध 1885 में किया था! सन 1925 में हिन्दू-महासभा बनने के बाद यह शब्द स्वीकार हुआ! यह एक राजनीतिक शब्द है, कोई धर्म नही है! मुग़लबादशाह जब हिंदुस्तान कहा करते थे तब उसका अर्थ होता था सिन्धु नदी के पूर्व के लोग! उस बात से भी धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! भारतीय संस्कृति में कहा गया है "धारण करे सो धर्म" ! भारत में बहुत तरह की संस्कृतियाँ प्रचलित थी! ज्ञात स्रोतों के अनुसार महावीर और बुद्ध के समय 65 मान्यताएं थी जिनमें आस्तिको की दर्जनों, नास्तिको की दर्जनों और उच्छेदवादियों की दर्जनों मान्यताएं थी! आरएसएस का हिन्दू-धर्म कहता है सभी हिन्दू हैं और उनका एक मात्र खुदा "रामचंद्र" है, यह बात किसी को भी बुरी लग सकती है! गुर्जर को ज्यादा बुरी लगती है! संविधान में लिखित छ: धर्म हैं अब सात हो गए हैं! ...

वाल्मीकि समाज जय श्रीराम कभी न बोले ---

वाल्मीकि समाज जय श्रीराम कभी न बोले --- जंग में एक की ही विजय होती है! राम-वाल्मीकि युद्ध में महर्षि वाल्मीकि के शिष्यों की विजय हुई थी! और यह समझौता हुआ था कि आश्रम की भूमि राज्य के अधीन नही होगी! राम-राज्य की फटकर हाथ में आ गयी थी! संबुक ऋषि के आश्रम की भूमि ही कब्ज़ा की जा सकी और उनकी हत्याकर दी गयी! महर्षि वाल्मीकि ने जो इतिहास रचा उसके बाद राम की सेना की कभी हिम्मत नही हुई की आश्रम की तरफ आँख उठाकर देखें! केवल जय वाल्मीकि कहे! जय श्री राम कभी नही बोले!  

राज्य का धर्म और मोदी-लाला --

  राज्य का धर्म और मोदी-लाला -- Ghanshyam Dass एक मूर्ख ही मेरी तुलना मोदी-लाला से कर सकता है! " कहाँ राजा-भोज और कहाँ गंगू तेली"! अंगूठा छाप दलालों के लाभ के लिए मोदी-लाला काम कर रहा है! अब सुनो राज्य का धर्म क्या है? १ जन्म के आधार पर किसी की बुद्धि के विकास पर अंकुश न लगे किन्तु मोदी-लाला ने शिक्षा का निजीकरण करके वे दीवारे खड़ी कर दीं है! २. राज्य का दूसरा धर्म है किसी के साथ अन्याय न होने पायें किन्तु न्याय पालिका में न्याय बिकता है! मोदी-लाला न्याय में समानता नही ला रहा है! ३. राज्य का तीसरा धर्म है दैवीय अपदाओ के समय राज्य की जनता के जान-माल की रक्षा करे किन्तु मोदी-लाला की सरकार की नीतियाँ तो कटोरा छाप हैं! दैवीय आपदा के समय सरकार कटोरा लेकर खड़ी हो जाती है तथा अस्पतालों का निजीकरण करके मोदी-लाला ने जनता को लाचार बना दिया है! एक महा-धूर्त मोदी-लाला के कामो को मेरी बाते के समतुल्य लाकर आपने अक्षम्य अपराध किया है !

सनातनियो तथा मनुवादियों से सावधान --

  सनातनियो तथा मनुवादियों से सावधान -- सत्य से कब तक मुहं छिपाओगे! 132 करोड़ को हिन्दू बताओगे तो सच तो बताना ही पड़ेगा ! दुसाध समाज के महर्षि संबुक का हत्यारा रामचंद्र महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पर भी कब्ज़ा करना चाहता था जो उनके जीते जी न किया जा सका ! रामायण की रचना करके महर्षि वाल्मीकि ने इस दुष्ट राजा का इतिहास सुरक्षित कर दिया! कालांतर में वाल्मीकि समाज के लोगो पर बहुत अत्याचार किये गये जैसे आज कल मुस्लिमो पर किये जा रहें हैं और उन्हें 132 करोड़ हिंदूओ में गिना जा रहा है! वाल्मीकि समाज को इन दुष्ट मनुवादियों/सनातनियों से सावधान रहना ही होगा !

वाल्मीकि समाज को शिक्षा के अधिकार के किसने बंचित किया ?

  वाल्मीकि समाज को शिक्षा के अधिकार के किसने बंचित किया ? राम-राज्य तो पढ़ने पर ही रोक लगता है ! संबुक ऋषि की तो पढ़ने के कारण ही हत्या कर दी! वाल्मीकि को पालतू बना लिया तथा उनकी अगली पीढ़ी को शिक्षा से बंचित कर दिया ! गैर-मनुवादी ब्राह्मण वाल्मीकि की अगली पीढियों को पढने नही दिया गया तथा घ्रणित कार्य में संलग्न करके शूद्र और शूद्रो में अतिशूद्र-अश्प्रश्य बना दिया गया! इस प्रश्न का उतर खोजा ही जाना चाहिए कि राजकवि वाल्मीकि की अगली पीढियां शिक्षा से बंचित कैसे हो गयी ? वे वाल्मीकि के सामान प्रकांड विद्वान क्यों नही हो सके, उनको शिक्षा के अधिकार से किसने बंचित किया ? आरएसएस का जहर राग ! स्वामी मोनी शाह जी कब तक सत्य को नकारोगे ! मुस्लिम के कारण केवल वाल्मीकि समाज अस्प्रश्य हुआ बांकी जातियां क्यों नही हुईं, अगर बात मुस्लिम अत्याचार की ही है तो दूवेदी, चतुर्वेदी और पाण्डेय सभी को अछूत हो जाना चाहिए था केवल बाल्मीकि समाज ही अछूत क्यों हुआ? स्वामी जी सत्य पर ध्यान धरें अन्यथा धरती फट जाएगी ! मूर्खताएं न बांटे सत्य को स्वीकार करें !

ज्योतिष में भी मनुवाद का छल !

  ज्योतिष में भी मनुवाद का छल ! जन्म के समय पृथ्वी की जिस सतह पर बच्चा है,वह सतह जिस तारामंडल की सीध में होती है वह लग्न राशी है इसका जाति से कोई सम्बन्ध नही है! अब तो आधुनिक एस्ट्रोलॉजी में है,कहीं से कोई भी किताब खरीद कर पढ़ लो या नेट पर खोज लो! सभी तारा-मंडल फोटो के साथ मिल जायेंगे! पृथ्वी १२ तारा-मंडलों से घिरी है इन्हें राशी (मेष वृषभ मिथुन ..)कहा जाता है!घुमती हुई पृथ्वी की सतह हर दो घंटे में राशी बदलती है! इंटरनेट से अपनी लग्न राशि को जाने और वर्ण को पहचाने तदनुरूप कर्म करें, वह आपको सरल लगेगा! पाखंडियों के बताये उपचार में न फसें! कर्क वृश्चिक मीन => ब्राह्मण वर्ण; मेष सिंह धनु => क्षत्रिय वर्ण; वृषभ कन्या मकर => वैश्य वर्ण; मिथुन तुला कुम्भ => शूद्र वर्ण; ज्योतिष सैंकड़ो वर्षो के प्रेक्षण से उत्पन्न निष्कर्ष हैं,यह विशुद्ध विज्ञान है! काला-जादू ने विज्ञान का सत्यानाश किया,पंडो ने इसका इंटरनेट से अपनी लग्न राशि को जाने और वर्ण को पहचाने तथा प्रतिभा का उसी दिशा में विकास करें जिस वर्ण के हो, जीवन सफल और आसान होगा! मायावती की कुंडली कर्क लग्न की है कर्क लग्न वृश्चिक ...

अम्बेडकरवादी अंध भक्ति क्यों करें ?

  अम्बेडकरवादी अंध भक्ति क्यों करें ? बाबा साहब ने जब वेदों और पुराणों का अध्ययन किया तब जाना कि यह शूद्रो के लिए पढ़ना वर्जित क्यों थे! क्योकि शूद्रो के खिलाफ इन में षड्यंत थे ! बाबा साहब के जाने के बाद शूद्र इनको नही पढ़ते! उन ग्रंथो में शूद्रो के खिलाफ षड्यंत्र थे एक बात है! उन ग्रंथो में ऐसी कौन सी बाते थी जिनके कारण सवर्ण संगठित रह सके और शूद्र आपस में ही लड़ते रहे इन सब को भी जानना होगा ! मनुवाद के सामने उल्टा खड़ा रहना या मनुवाद को उलटा खड़ा करते रहना अम्बेडकरवाद नही है! अंबेडकरवाद बुद्धिवाद है ज्ञान अर्जनवाद है! मनुवाद, ब्राह्मणवाद और अन्य सभी वादों को उल्ट-पलट कर देखेंगे "जो सत्य की कसौटी पर खरे उतरेंगे उन्हें स्वीकार भी करेंगे"! न अँधा अनुकरण करेंगे और न ही अंधे होकर त्यागते जायेंगे ! विज्ञान को भी झुठलाओगे, मात्र इसलिए क्योंकि उसपर कुछ पाखंडियो का कब्ज़ा था Ajay Kumar मित्र, इतना सरल प्रश्न मुझे क्यों दिया? आप खुद हल कर लेते! बुखार की गोली डाक्टर लेता है वह भी ठीक हो जाता है! अनपढ़ रोगी लेता है वह भी ठीक हो जाता है! मैं डॉक्टर और रोगी के ठीक होने की बात ही नही कर रहा हूँ!...

अपना वर्ण जाने --

  अपना वर्ण जाने -- १. कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न बाले जातक ब्राह्मण वर्ण के होते हैं चाहें वे किसी कुल जाति या उप-जाति में ही क्यों न पैदा हुए हों? इसी प्रकार २. मेष, सिंह और धनु लग्न वाले जातक क्षत्रिय वर्ण के होते हैं और ३. वृषभ, कन्या और मकर लग्न बाले जातक वैश्य वर्ण के होते हैं तथा ४. मिथुन तुला और कुम्भ लग्न बाले जातक शूद्र वर्ण के होते हैं! वर्ण जातक(जन्मा-बच्चा) के संभावित गुण और प्रकृति है अगर उसको उन कार्यो को करने का अवसर दिया जायेगा तो वह अच्छा कार्य करेगा अन्यथा वह कुंठित होगा और समाज में विकृति फैलाएगा! ब्राह्मणवर्ण और ब्राह्मण-जाति व ब्राह्मण-जातियों की उपजातियां सभी अलग विषय हैं! ज्योतिष विज्ञान का ज्ञान व्राह्मण-वर्ण, क्षत्रिय-वर्ण, वैश्य-वर्ण और शूद्र-वर्ण के विषय में है! पाखंडियों ने अपने उत्तराधिकारियो को सशक्त बनाये रखने के लिए ब्राह्मण-वर्ण की संतानों को ब्राह्मण कहने लगे जबकि नक्षत्र और लग्न राशि के अनुसार वे किसी अन्य वर्ण के थे! इसलिए वैभव पर मालिकाना हक़ बनाये रखने के चक्कर में पाखंडियों ने ज्योतिष विज्ञान का सत्यानाश कर दिया !

जातिवाद की एक कहानी ---

  जातिवाद की एक कहानी --- क्रान्तिकारी जय भीम भाईयों #मेरी_लाईफ_का_कड़वा_सच अाप में से कुछ भाई लोग हमें कमेंट करके कह रहे हैं कि बहन जी काश आप हमारी बेटी,बहन या परिवार का हिस्सा होतीं। मैं आप के नेक सोच के लिये दिल की गहराई से धन्यवाद करती हुं । लेकिन मेरे जीवन के कुछ कड़वा सच है मैं चाहती हुं कि आप लोग भी जानें उसके बाद भी अगर आप चाहते हैं कि मैं आप के परिवार का हिस्सा बनुं तो स्वागत योग्य है। भले ही मैं हिन्दु धर्म के मौर्या परिवार में पैदा हुई ,पली बढ़ी सामाजिक तौर तरिकों को देखी समझी मुझे बहुत सी बातें तकलिफ देने वाली थी। जैसे किसी चमार,खटिक,पासी,दुसाध के छु जाने पर तुरंत नहाने का सलाह,किसी निची जाति वालों के लड़कीयों से दोस्ती नहीं कर सकती,बात नहीं कर सकती ।मेरे दिल में एक ही सवाल उठता क्यों नहीं बात कर सकती ,क्यों नहीं सहेली बन सकती किसी लड़की के साथ मात्र बैठ कर बात कर लेने पर क्यों नहाना जरुरी है? मम्मी,पापा,परिवार से पुछने पर वो हमसे निची जाति के हैं इसलिये या फिर डांट का सामना करना पड़ता। कितनी भयानक जातिवाद के चपेट में है अभी गवंई इलाका एक इंसान दुसरे वाले इंसान के साथ व...