बाबा साहब की हत्या क्यों ----
बाबा साहब की हत्या क्यों ----
जैन जी, चाय की टेबल पर कोई इतना झूठ तो नही बोलेगा ! बात में कुछ तो सच्चाई है ! गुर्जर खुद को हिन्दू कहलाना पसंद नहीं करते! जाटो के बारे में अभी मैं कुछ नही कह सकता हूँ! वैसे भारत में हिन्दू नाम का कभी कोई धर्म नही रहा है! दयानंद सरस्वती ने इस शब्द का विरोध 1885 में किया था! सन 1925 में हिन्दू-महासभा बनने के बाद यह शब्द स्वीकार हुआ! यह एक राजनीतिक शब्द है, कोई धर्म नही है! मुग़लबादशाह जब हिंदुस्तान कहा करते थे तब उसका अर्थ होता था सिन्धु नदी के पूर्व के लोग! उस बात से भी धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! भारतीय संस्कृति में कहा गया है "धारण करे सो धर्म" ! भारत में बहुत तरह की संस्कृतियाँ प्रचलित थी! ज्ञात स्रोतों के अनुसार महावीर और बुद्ध के समय 65 मान्यताएं थी जिनमें आस्तिको की दर्जनों, नास्तिको की दर्जनों और उच्छेदवादियों की दर्जनों मान्यताएं थी! आरएसएस का हिन्दू-धर्म कहता है सभी हिन्दू हैं और उनका एक मात्र खुदा "रामचंद्र" है, यह बात किसी को भी बुरी लग सकती है! गुर्जर को ज्यादा बुरी लगती है! संविधान में लिखित छ: धर्म हैं अब सात हो गए हैं! अन्य धर्मो को "अन्य" कहकर संविधान में छोड़ दिया गया है! वे धर्म अपनी विधिक मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे हैं! गुर्जर राजा द्वारा संसद में बाबा साहब की हत्या उसी मानसिक वेदना का परिणाम है! जवाहर लाल नेहरु ने इस घटना को बड़ी चतुराई से छिपा दिया! किन्तु यह घटना संसद और सर्वोच्य न्यायालय की लोककथाओ में प्रचलित है! हर गुर्जर अपने आपको हिन्दू कहलाने में संकोच महसूस करता है! परन्तु बाबा साहब की हत्या की बात सरकारी अभिलेखों में न आजाये इसलिए शांत रहता है !
Comments
Post a Comment