ज्योतिष में भी मनुवाद का छल !

 

ज्योतिष में भी मनुवाद का छल !


जन्म के समय पृथ्वी की जिस सतह पर बच्चा है,वह सतह जिस तारामंडल की सीध में होती है वह लग्न राशी है इसका जाति से कोई सम्बन्ध नही है!

अब तो आधुनिक एस्ट्रोलॉजी में है,कहीं से कोई भी किताब खरीद कर पढ़ लो या नेट पर खोज लो! सभी तारा-मंडल फोटो के साथ मिल जायेंगे!

पृथ्वी १२ तारा-मंडलों से घिरी है इन्हें राशी (मेष वृषभ मिथुन ..)कहा जाता है!घुमती हुई पृथ्वी की सतह हर दो घंटे में राशी बदलती है!

इंटरनेट से अपनी लग्न राशि को जाने और वर्ण को पहचाने तदनुरूप कर्म करें, वह आपको सरल लगेगा! पाखंडियों के बताये उपचार में न फसें!

कर्क वृश्चिक मीन => ब्राह्मण वर्ण;
मेष सिंह धनु => क्षत्रिय वर्ण;
वृषभ कन्या मकर => वैश्य वर्ण; मिथुन तुला कुम्भ => शूद्र वर्ण;

ज्योतिष सैंकड़ो वर्षो के प्रेक्षण से उत्पन्न निष्कर्ष हैं,यह विशुद्ध विज्ञान है! काला-जादू ने विज्ञान का सत्यानाश किया,पंडो ने इसका

इंटरनेट से अपनी लग्न राशि को जाने और वर्ण को पहचाने तथा प्रतिभा का उसी दिशा में विकास करें जिस वर्ण के हो, जीवन सफल और आसान होगा!

मायावती की कुंडली कर्क लग्न की है कर्क लग्न वृश्चिक लग्न और मीन लग्न वाले ब्राह्मण वर्ण में आते है, इन लग्नो में पैदा जातक बौद्धिक कार्य करते हैं!

बाबा साहब की कुंडली मीन लग्न की है मीन लग्न कर्क लग्न और वृश्चिक लग्न वाले ब्राह्मण वर्ण में आते है, इन लग्नो में पैदा जातक बौद्धिक कार्य करते हैं!


विज्ञान को भी झुठलाओगे, मात्र इसलिए क्योंकि उसपर कुछ पाखंडियो का कब्ज़ा था

Ajay Kumar मित्र, इतना सरल प्रश्न मुझे क्यों दिया? आप खुद हल कर लेते! बुखार की गोली डाक्टर लेता है वह भी ठीक हो जाता है! अनपढ़ रोगी लेता है वह भी ठीक हो जाता है! मैं डॉक्टर और रोगी के ठीक होने की बात ही नही कर रहा हूँ! मैं उस बुखार की गोली की बात कर रहा हूँ! ज्योतिष एक विज्ञान है जो ग्रहों से परवर्तित तरंगो और तारो से आने वाली ऊर्जा तरंगो के कारण जातक (जन्मा-बच्चा) पर जो प्रभाव पड़ता है उसका अध्ययन करता है! इन तरंगो का अध्ययन किया जाये या न किया जाये मनुष्य सहित सभी प्राणियों और पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ता ही है ! आप भी जानते हैं समुद्र में ज्वार -भाटा चन्द्र कलाओ के प्रभाव के कारण आता है! विशाल समुद्र पर परिवर्तित चन्द्र कलाएं पूर्णमासी-और अमावश की रात में इतना प्रभाव डालती हैं तो मनुष्य पर कितना डालती होंगी? इसका अध्ययन किया ही जाना चाहिए आखिर कार मनुष्य का शरीर भी तो 70% पानी का बना हुआ है! क्या समझे ?


अम्बेडकरवादी अंध भक्ति क्यों करें ?

बाबा साहब ने जब वेदों और पुराणों का अध्ययन किया तब जाना कि यह शूद्रो के लिए पढ़ना वर्जित क्यों थे! क्योकि शूद्रो के खिलाफ इन में षड्यंत थे ! बाबा साहब के जाने के बाद शूद्र इनको नही पढ़ते! उन ग्रंथो में शूद्रो के खिलाफ षड्यंत्र थे एक बात है! उन ग्रंथो में ऐसी कौन सी बाते थी जिनके कारण सवर्ण संगठित रह सके और शूद्र आपस में ही लड़ते रहे इन सब को भी जानना होगा ! मनुवाद के सामने उल्टा खड़ा रहना या मनुवाद को उलटा खड़ा करते रहना अम्बेडकरवाद नही है! अंबेडकरवाद बुद्धिवाद है ज्ञान अर्जनवाद है! मनुवाद, ब्राह्मणवाद और अन्य सभी वादों को उल्ट-पलट कर देखेंगे "जो सत्य की कसौटी पर खरे उतरेंगे उन्हें स्वीकार भी करेंगे"! न अँधा अनुकरण करेंगे और न ही अंधे होकर त्यागते जायेंगे !


मनुवाद के सामने उल्टा खड़ा रहना या मनुवाद को उलटा खड़ा करते रहना अम्बेडकरवाद नही है,न अँधा अनुकरण करेंगे और न ही अंधे होकर त्यागेंगे

अभिव्यक्ति की आजादी, प्रदर्शन की आजादी, अश्लीलता फ़ैलाने की आजादी और कितनी आजादी चाहिए? आजादी प्रकृति के सिद्धांत से ऊपर नही है! एक की आजादी जब दुसरे की आजादी का अतिक्रमण करती है तो संघर्ष होते हैं, होते रहेंगे!


शिक्षा, चिकित्सा व न्याय ब्राह्मण वर्ण के कार्य है,जब वैश्य वर्ण के व्यक्ति से यह कार्य कराया जायेगा तो वह इसमें लाभ की तलाश करेगा

कर्क वृश्चिक मीन लग्न वाले ब्राह्मण वर्ण के
मेष सिंह धनु क्षत्रिय वर्ण, वृषभ कन्या मकर वैश्य वर्ण,
मिथुन तुला कुम्भ शूद्र वर्ण के


अपना वर्ण जाने --

१. कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न बाले जातक ब्राह्मण वर्ण के होते हैं चाहें वे किसी कुल जाति या उप-जाति में ही क्यों न पैदा हुए हों? इसी प्रकार २. मेष, सिंह और धनु लग्न वाले जातक क्षत्रिय वर्ण के होते हैं और ३. वृषभ, कन्या और मकर लग्न बाले जातक वैश्य वर्ण के होते हैं तथा ४. मिथुन तुला और कुम्भ लग्न बाले जातक शूद्र वर्ण के होते हैं! वर्ण जातक(जन्मा-बच्चा) के संभावित गुण और प्रकृति है अगर उसको उन कार्यो को करने का अवसर दिया जायेगा तो वह अच्छा कार्य करेगा अन्यथा वह कुंठित होगा और समाज में विकृति फैलाएगा! ब्राह्मणवर्ण और ब्राह्मण-जाति व ब्राह्मण-जातियों की उपजातियां सभी अलग विषय हैं! ज्योतिष विज्ञान का ज्ञान व्राह्मण-वर्ण, क्षत्रिय-वर्ण, वैश्य-वर्ण और शूद्र-वर्ण के विषय में है! पाखंडियों ने अपने उत्तराधिकारियो को सशक्त बनाये रखने के लिए ब्राह्मण-वर्ण की संतानों को ब्राह्मण कहने लगे जबकि नक्षत्र और लग्न राशि के अनुसार वे किसी अन्य वर्ण के थे! इसलिए वैभव पर मालिकाना हक़ बनाये रखने के चक्कर में पाखंडियों ने ज्योतिष विज्ञान का सत्यानाश कर दिया !

ब्राह्मण ही सत्ता पर काबिज होगा, वह ब्राह्मण सामाजिक हो या गैर-सामाजिक ब्राह्मण!

ब्राह्मण ही सत्ता तक पहुँचने की इच्छा करता है!

जाति प्रथा के अंत का मार्ग -

XXXX मित्र, ज्योतिष वह विज्ञान है जिससे आप जन्मे बच्चे की प्रतिभा का मार्ग निधारित कर सकते हैं! ज्योतिष के अनुसार प्रतिभाओ को चार वर्णों में विभक्त किया गया है, ज्ञान परक कार्य(जिसे ब्रह्मनीय कार्य कह दिया गया) क्षत्रिय कार्य, वैश्यगत कार्य और श्रमिको के कार्य! किन्तु पाखंडियो ने अपने विरोधियो का सत्यानाश करने के लिए कुछ अस्प्रश्य कार्य भी बना डाले तथा उन लोगो पर अत्याचार भी किया, उसी का परिणाम है, जाति-प्रथा और उसका समाज विरोधी विनाशकारी रूप! केवल जाति-प्रथा का विरोध ही नही करना है बल्कि उसकी उत्पत्ति के कारणों को जानकर सही समय पर अन-उपयुक्त व्यक्ति पर चोट करने के लिए समाज को सु-शिक्षित करना होगा!


ज्योतिष बरदान या अभिशाप?

XXXX यह आपका माइंड-सेट है, विज्ञान को सम्मान तो देना होगा ज्योतिष एक विज्ञान है जो खगोलीय घटनाओ का मानव चित पर पड़ने वाले प्रभाव के अध्ययन के साथ ही उसके परिवेश के परिवर्तन का अध्ययन करता है! यह एक विशुद्ध विज्ञान है जिस पर पश्चिमी देशो के वैज्ञानिक भी आजकल काम कर रहे हैं! पाखंडियो के हाथ में पड़ जाने के कारण यह सामाजिक भेद-भाव पैदा करने का हथियार बन गया है! जैसे परमाणु उर्जा से परमाणु भट्टियां चलाई जाती हैं और विधुत का उत्पादन किया जाता है दूसरी ओर परमाणु बम बनाकर मानवता का विनाश किया जाता है! पाखंडियो ने भारत में यही किया है!


बहुत कम लोग जानते होंगे कि ज्योतिष के अनुसार बाबा साहब ब्राह्मण वर्ण के हैं भले ही उनका जन्म शूद्र-जाति की एक उपजाति महार में हुआ!

सवर्णों को एक बात भली-भांति याद रखनी चाहिए, शूद्र-कुल में पैदा हुआ एक ही ब्राह्मण आपके अत्याचारी साम्राज्य को समाप्त कर देगा!

ज्योतिष में उच्च-नीच नक्षत क्या है?

XXXXX नक्षत के उंच और नीच होने का मतलब है कि उसका प्रभाव कैसा होता है? इस बात को ऐसे समझ सकते हो, सड़क पर रात्रि में चलने वाले दो वाहन जब आमने सामने आ जाते हैं तब तीब्र रोशनी वाला वाहन कम रोशनी वाले वाहन को अँधा कर देता है (दूसरा चालक सामने की सड़क को नही देख पाता है) यही गृहों की परिवर्तित उर्जा और नक्षत्रो की उर्जा के बीच होता है ! जो प्रभावी उर्जा होती है उसे उच्च कहा जाता है और जो निष्-प्रभावी उर्जा होती है उसे नीच कहा है! ज्योतिष की भाषा साहित्य की भाषा है इसके वैज्ञानिक अर्थ निकालने होंगे, उस समय लेखन की कला नही थी इसलिए सम्पूर्ण ज्ञान को साहितिक भाषा में कहा गया है ताकि याद रखना सहज हो !

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