जातिवाद की एक कहानी ---
जातिवाद की एक कहानी ---
क्रान्तिकारी जय भीम भाईयों
#मेरी_लाईफ_का_कड़वा_सच
अाप में से कुछ भाई लोग हमें कमेंट करके कह रहे हैं कि बहन जी काश आप हमारी बेटी,बहन या परिवार का हिस्सा होतीं।
मैं आप के नेक सोच के लिये दिल की गहराई से धन्यवाद करती हुं ।
लेकिन मेरे जीवन के कुछ कड़वा सच है मैं चाहती हुं कि आप लोग भी जानें उसके बाद भी अगर आप चाहते हैं कि मैं आप के परिवार का हिस्सा बनुं तो स्वागत योग्य है।
भले ही मैं हिन्दु धर्म के मौर्या परिवार में पैदा हुई ,पली बढ़ी सामाजिक तौर तरिकों को देखी समझी मुझे बहुत सी बातें तकलिफ देने वाली थी।
जैसे किसी चमार,खटिक,पासी,दुसाध के छु जाने पर तुरंत नहाने का सलाह,किसी निची जाति वालों के लड़कीयों से दोस्ती नहीं कर सकती,बात नहीं कर सकती ।मेरे दिल में एक ही सवाल उठता क्यों नहीं बात कर सकती ,क्यों नहीं सहेली बन सकती किसी लड़की के साथ मात्र बैठ कर बात कर लेने पर क्यों नहाना जरुरी है?
मम्मी,पापा,परिवार से पुछने पर वो हमसे निची जाति के हैं इसलिये या फिर डांट का सामना करना पड़ता।
कितनी भयानक जातिवाद के चपेट में है अभी गवंई इलाका एक इंसान दुसरे वाले इंसान के साथ व्यवहार,मान ,सम्मान के साथ बातचीत का लहजा भी जाति के आधार पर करता है।
ऐसा क्यों करते हैं लोग हमेशा मेरे लिये सोचनिय विषय रहा।
स्कुल से निकलकर कॉलेज गये तो हमारे कई कन्फ्युजन दुर हुए,सवालों के जबाब परत दर परत मिलते गये।
जातिवाद वो उंची जाति का ये निची जाति का ,उंची जाति वाले ये कर सकते हैं निची जाति वालों को ये नहीं करना चाहिए
पता चला यह सब ब्राह्मण के द्वारा हमारे महान देव आज्ञा या देवबाणी (धर्म शास्त्रों) के आधार पर किया जाता है
मैं उसी दिन प्रण किया कि आज के बाद ब्राह्मण वादी परमपरा को कभी नहीं मानुंगी ।
उसी समय आनंद जी हमारी लाईफ में आये उनके सोच विचार बहुजन समाज को जगाने का जुनुन मुझे बहुत गहरा असर किया ।
मैं उनके साथ शादी करना चाहती हुं ऐसा अपनी माता जी को बताया लेकिन मेरी बात को समझने के वजाय उल्टा मुझे डांट कर और पढ़ाई छुड़ाने की धमकी देकर चुप करा दिया गया।
लेकिन मैं पता नहीं आप की नजर में सही किया या गलत मैं नहीं जानती लेकिन एक कठोर फैसला कर चुकी थी
मुझे जातिवाद के बंधन को तोड़ना था,मनुवाद के खिलाफ मजबुती से खड़ा होना था,उनके बनाये हर पाखंडी रिति रिवाज को लात मारकर आगे बढ़ना था।
एक दिन कॉलेज जाते समय मैं सुबह ही अपनी मम्मी को बोली की अब मैं कभी लौटकर नहीं आउंगी।
और मैं हमेशा के लिये अपना घर , परिवार छोड़कर आनंद जी के पास आ गयी।मैं आनंद जी के साथ कोर्ट मैरेज करके ब्राह्मणी परमपरा रिति रिवाज को लात मारी, अन्तर्जातिय विवाह करके जातिवाद की परमपरा को लात मारी
हमने दो साल तक कैसे जीवन बिताया वो हम जानते हैं
उधर गांव वालों की , परिवार वालों के ताने सुन सुन कर मेरी माता जी को ये सदमा बर्दास नहीं हुआ और वो चल बसीं।
गांव वालों के ताने को झेलने के लिये मेरे पिता जी हद से ज्यादा ड्रिंक करने लगे , परिवार के लोग हमसे कोई रिश्ता नहीं ऱखते चाचा भाई पापा सभी रिश्तेदार लोगों को इस बात का तकलिफ नहीं है कि हम भागकर शादी की , लेकिन उन लोगों को इस बात का ज्यादा तकलिफ है कि मैं चमार से शादी क्यों की?
मैं लाख समझाने की कोशिश की कि वर्ण व्यवस्था के अनुसार मैं और आनंद जी दोनों ही शुद्र हैं ।
आज भी करिब मेरे परिवार रिश्तेदार के कई लोग पेज से जुड़े है और जब कोई हमारे पोस्ट पर गाली गलौज या उल्टा पुल्टा कमेंट करता है तो वो लोग कहते हैं कि इस बदचलन लड़की ने पुरे परिवार को समाज में तो मुंह दिखा ने लायक नहीं छोड़ी है अब फेसबुक पर इज्जत निलाम कर रही है।
अब आप ही फैसला करिए कि क्या सच में इतना जानने के बाद भी आप चाहते हैं कि मेरे जैसी मां,बाप,परिवार को समाज में निचा दिखा ने वाली को अपनी बेटी या बहन के रुप में स्वीकार करना चाहेंगे।
मैं नहीं जानती कि गांव समाज या दुनियां वाले मेरे बारे में क्या कहते सोचते हैं लेकिन मैं इतना जानती हुं कि मैं एक इंसान हुं इंसान को जीवन साथी बनाकर,इंसानियत को जिन्दा रखने की छोटी कोशिश कर रही हूं।
-आरती मौर्या
Comments
Post a Comment