अम्बेडकरवादी अंध भक्ति क्यों करें ?
अम्बेडकरवादी अंध भक्ति क्यों करें ?
बाबा साहब ने जब वेदों और पुराणों का अध्ययन किया तब जाना कि यह शूद्रो के लिए पढ़ना वर्जित क्यों थे! क्योकि शूद्रो के खिलाफ इन में षड्यंत थे ! बाबा साहब के जाने के बाद शूद्र इनको नही पढ़ते! उन ग्रंथो में शूद्रो के खिलाफ षड्यंत्र थे एक बात है! उन ग्रंथो में ऐसी कौन सी बाते थी जिनके कारण सवर्ण संगठित रह सके और शूद्र आपस में ही लड़ते रहे इन सब को भी जानना होगा ! मनुवाद के सामने उल्टा खड़ा रहना या मनुवाद को उलटा खड़ा करते रहना अम्बेडकरवाद नही है! अंबेडकरवाद बुद्धिवाद है ज्ञान अर्जनवाद है! मनुवाद, ब्राह्मणवाद और अन्य सभी वादों को उल्ट-पलट कर देखेंगे "जो सत्य की कसौटी पर खरे उतरेंगे उन्हें स्वीकार भी करेंगे"! न अँधा अनुकरण करेंगे और न ही अंधे होकर त्यागते जायेंगे !
विज्ञान को भी झुठलाओगे, मात्र इसलिए क्योंकि उसपर कुछ पाखंडियो का कब्ज़ा था
Ajay Kumar मित्र, इतना सरल प्रश्न मुझे क्यों दिया? आप खुद हल कर लेते! बुखार की गोली डाक्टर लेता है वह भी ठीक हो जाता है! अनपढ़ रोगी लेता है वह भी ठीक हो जाता है! मैं डॉक्टर और रोगी के ठीक होने की बात ही नही कर रहा हूँ! मैं उस बुखार की गोली की बात कर रहा हूँ! ज्योतिष एक विज्ञान है जो ग्रहों से परवर्तित तरंगो और तारो से आने वाली ऊर्जा तरंगो के कारण जातक (जन्मा-बच्चा) पर जो प्रभाव पड़ता है उसका अध्ययन करता है! इन तरंगो का अध्ययन किया जाये या न किया जाये मनुष्य सहित सभी प्राणियों और पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ता ही है ! आप भी जानते हैं समुद्र में ज्वार -भाटा चन्द्र कलाओ के प्रभाव के कारण आता है! विशाल समुद्र पर परिवर्तित चन्द्र कलाएं पूर्णमासी-और अमावश की रात में इतना प्रभाव डालती हैं तो मनुष्य पर कितना डालती होंगी? इसका अध्ययन किया ही जाना चाहिए आखिर कार मनुष्य का शरीर भी तो 70% पानी का बना हुआ है! क्या समझे ?
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