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Showing posts from August, 2020

कमर कस लो

  आज से ही कमर कस लो देवी, भारत देश को आजादी न तो गाँधी के कारण मिली है न आंबेडकर के कारण ! भारत की आजादी का मुख्य कारण था १. ब्रटिश सेना का सैनिक विद्रोह २. हिरोशिमा और नागासाकी की तबाही के बाद बने UN की अवधारणा ३. सुभाचंद्र बोष का शस्त्र आक्रमण से बनी अंतराष्ट्रीय छवि! 4 . सयुक्त राष्ट्र के गठन के बाद भारत को ही आजादी नहीं मिली है, ब्रिटेन ने 70 देशो को आजादी दी है यही देश कमान वेल्थ के देश कहलाते हैं! कांग्रेस ने तो विश्व हालातो में मलाई लूटने का काम किया है! इस सच्चाई को जानने के लिए किताबो के साथ अपने दिमाग को रगड़ो ! कोई राजनीतिक व्यक्ति इस सच्चाई से पर्दा नही उठाएगा ! आज कल विश्व के जो हालत चल रहे हैं उनमे सभी तानाशाह कुर्सी से चिपके रहने के लिए संविधान संशोधन कर रहे हैं! रूस ने संशोधन कर दिया है , बेलारूस ने भी संशोधन कर दिया है वहां भारी विरोध चल रहा है! भारत में भी वही हालत बनाये जा रहें हैं! आंबेडकरवाद का नर्म दल समझता है कि मोदी २०२४ का निष्पक्ष चुनाव होने देगा तो वे भारी भूल में हैं! यह काले अंग्रेज बिना रक्तपात के कुर्सी नही छोड़ेंगे आज से ही कमर कस लो!

पाखंड की वंशावली

  भृगुवंशी जोशी,भार्गव,पूरबिया,ज्योतिषी ब्राह्मण इतिहास-9977014777 भार्गव इतिहास में भार्गव वंश के आदि प्रवर्तक महर्षि भृगु के काल से लेकर सन् 1773 के अन्त तक का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है। ऋग्वेद तथा परवर्ती वैदिक साहित्य से स्पष्ट ज्ञात होता है कि आर्यों में जाति पांति का बन्धन नहीं था। वे सब अपने को एक ही जाति का मानते थे। परन्तु जिस प्रकार इंग्लैंड आदि पश्चिमी देशों में जन समुदाय तीन वर्गों में विभक्त माना जाता है उसी प्रकार वैदिक काल में भी आयो में तीन वर्ग थे। यज्ञ हवन करने कराने वाले ब्राह्मण कहलाते थे, जिन में मंत्रों के रचयिता ऋषि पद प्राप्त करते थे। राजा और उसके भाई बेटे क्षत्रिय कहलाते थे। शेष सब आर्य विश् कहलाते थे जिसका अर्थ साधारण जन है। क्या ग्राम का मुखिया और क्या किसान, क्या सैनिक और क्या ग्वाला, क्या बढ़ई और क्या जुलाहा सब इसी विश् वर्ग में माने जाते थे। ब्राह्मणों के आज जितने गोत्र पाये जाते हैं वे सब वैदिक काल के सात मूल वंशों की ही शाखा-प्रशाखा हैं। ये सात वंश भार्गव, आंगिरस, आत्रेय, काश्यप, वसिष्ठ, आगस्त्य और कौशिक हैं। इनमें सबसे प्राचीन भार्गव, आत्रेय और का...

यह पाखंड है या विज्ञान

यह पाखंड है या विज्ञान एक बात साफ है पृथ्वी तल का कोई भी बिन्दु एक दिवस में १२ राशियों के सामने से गुजर जाता है यह १२ राशियाँ २७.२७ नक्षत्र में विभक्त हैं हर नक्षत्र के ४ खंड है इस प्रकार एक राशि ३० डिग्री की और हर एक नक्षत्र १३.२ डिग्री का होता है! २७.२७ को ४ से गुना किया जाये तो 109.08 होता है! यह पल है या घड़ी इस में गोल मॉल है! आधुनिक समय प्रणाली से गणना की जाये तो एक नक्षत्र के सामने से पृथ्वी के किसी भी बिंदु को गुजरने का समय 54 मिनट है अर्थात किसी नक्षत्र का १/४ (चौथाई) भाग गुजरने में आधुनिक समय के अनुसार 13.4 मिनट लगता है इस प्रकार के 9 खंडो से एक राशि बनती है मतलब एक राशि में २.२५ नक्षत्र का अंश होता है अर्थात 119.8मिनट का समय लगता है! हर नक्षत्र का स्वामी गृह अलग-अलग होता है तथा राशियों का भी स्वामी गृह आलग-अलग होता है! इन ग्रहों व तारा-मंडल से निकलने वाली रश्मियाँ या परवर्तित राशियाँ पृथ्वी पर आकर जातक(जन्मे-व्यक्ति) के चित्त पर अपना प्रभाव डालती हैं! सूर्य एक तारा है जबकि राशियाँ तारो का समूह(तारा-मंडल) है! नक्षत्र समानांतर दूरी पर चुने गए तारे हैं जिनकी रश्मियाँ अन्य नौ ग...

न्यायालय की जिद

न्यायालय की जिद  मेरा अनुरोध जिन्दा देश भक्तो से है आप अपना विचार करें! संविधान में सात ही धर्म हैं ! सत्य निष्पक्ष है न्यायालय को बताना होगा कौन सा धर्म ? अब आठ धर्म हो गए हैं - लिंगायत धर्म को मान्यता मिल गयी है! झारखण्ड व् छत्तीसगढ़ में "सरना धर्म" के लोग भी अलग धार्मिक मान्यता के लिए संघर्षरत हैं! पिछली बार धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ था फिर बंटेगा अगर न्यायालय ने जिद न छोड़ी ! न्यायालय द्वारा रविदास मंदिर गिराये जाने के बाद रविदास समाज अलग धर्म के रूप में मान्यता की मांग कर रहा है क्योंकि सिक्ख-धर्म में आपस में मतभेद है ! धर्म तो बताना ही होगा कि न्यायालय कौन से धर्म पर काम करेगा?  

अपनी जाति का स्वाभीमान बचाओ

  अपनी जाति का स्वाभीमान बचाओ मनुवाद जब मालिक हो जायेगा तो आपको अपनी जाति की उन्नति के बारे में सोचने का हक़ भी ख़त्म हो जायेगा आप केवल निर्धारित काम ही कर सकेंगे! XXXXX ओबीसी के नाम पर लालू ,मुलायम, रामदेव, योगेन्द्र आदि नाम जाने जाते हैं और हिन्दू के नाम पर कल्याण सिंह! दलित के नाम पर मायावती बांकी जातियां संघर्ष ही नही करती हैं! आप को छोड़कर, और आपकी जाति भी संघर्ष क्यों करे, जब मोदी जी आपके चरणों में पड़े हैं! सफाई कर्मियों के पैर पकड़ कर मोदी ने दलितों के नीचे से जमीन खींच ली! क्या सफाई कर्मियों को नहीं पूछना चाहिए नयी शिक्षा नीति में उनके बच्चों के लिए क्या व्यवस्था है? गटर में घुसके काम करने वालो सफाई कर्मियों के लिए स्वास्थ्य की क्या व्यवस्था है ? और क्या व्यवस्था है सफाई कर्मियों के नियमित वेतन की? माननीय काशीराम जी ने सरकारी नौकरी छोड़कर दलितों के हक़ के लिए संघर्ष किया ! बहन मायावती ने समस्त सुखो का त्याग कर चमार जाति के लिए संघर्ष किया इसलिए यह जाति आगे हैं ! जिस जाति के पढ़े लिखे लोग सरकारी गुलामी छोड़ कर जाति के लिए संघर्ष करेंगे वह जाति आगे निकलेगी ही ! ओबीसी की तमाम जाति...

चमार और हेला पतित ब्राह्मण हैं --

  चमार और हेला पतित ब्राह्मण हैं -- वाल्मीकि ब्राह्मण तो हैं परन्तु पतित ब्राह्मण हैं! ब्राह्मण कभी राजा की स्तुति नही करता है वाल्मीकि ने राजा की स्तुति करके जो पाप किया था उसी का परिणाम है कि वाल्मीकि हेला (राजा के गू को उठाने वाला) होकर पतित ब्राह्मण हो गया! किन्तु यह कलयुग है जोकि ४ लाख ३२ हजार वर्ष का कहा जाता है जिसके मात्र ५ हजार वर्ष ही वितीत हुए हैं! हेला और और चमार दोनो ही मूल रूप से पतित ब्राह्मण हैं! मैं ब्राह्मण शब्द को भाव वाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग कर रहा हूँ जोकि बाद में जाति वाचक संज्ञा हो गयी और इन पतित ब्रह्मणों के कुल ही आगे चल कर हेला और चमार के रूप में जाने गये हैं! यह बाते किसी पोथी को पढ़ने ने से नहीं मिलेगीं समस्त पोथियों को निचोड़ने से मिलेंगी क्योकि दलित/शूद्रो के पास न तो अपना साहित्य है और न ही अपना इतिहास ! सवर्णों की लिखी गयी पोथी से अपना इतिहास तार्किक रूप से निका लना होगा !......

गे पार्टी

  Shemale और Gay आरएसएस प्रदत भाजपा संस्कृति का अंग है! सन २०१३ में भाजपा के मंत्री राघव जी अपने नौकर के साथ पकड़े गए थे अखबारों में एन.डी तिवारी जी और राघव जी का बोलबाला था इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय ने इन दोनो के कुकृत्यो को मान्यता दे दी ! राघव जी का कार्य Shemale का कार्य था अब इसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मान्यता प्राप्त है! दूसरी तरफ नारी स्वछंदता को छूट दे दी गयी अब तिवारी जैसे लोग को जेल में नहीं डाला जा सकता भले ही वे दूसरे की बीबी से बच्चा ही क्यों न पैदा कर दें !

वे प्रकट हुए और मालिक बन गए !

  वे प्रकट हुए और मालिक बन गए ! आपकी बात सही है परन्तु दलित राजनीति इसको स्वीकार करना नही चाहती! बौद्ध धर्म का विस्तार किये बिना दलित राजनीति सफल नही होगी क्योंकि बौद्धों को ही फिर से शूद्र बना दिया गया जो सेवा कार्य में नही लगे उन्हें ज्यादा उत्पीडित किया गया और अस्पृश्य बना दिया गया शूद्रो की जब तक अपने धर्म में बापसी नहीं होती शूद्र राजनीति सफल नही होगी! झूंठ के साहित्य को गढ़ने में बहुत समय लगता है, और साहित्य को इतिहास बनाने के लिये "प्रकट हुए" जैसी मान्यताओ का सहारा लिया गया ! जैसे रामलला प्रकट होकर आज 70 साल के हो गए और उन्होंने मालिकाना हक़ भी ले लिया !

जाति हीनता की ग्रंथि --

  जाति हीनता की ग्रंथि -- जाति की हीनता का भाव हमारे अन्दर होता है! मेरे एक आंबेडकरवादी मित्र हैं, उनको अपना नाम सुनकर हीनता का वोध होता है! उनका नाम कृष्ण कुमार है कोई उन्हें उनके नाम से बुला दे तो झगड़ा कर लेते हैं, वे कहते हैं कि उनको केवल के.के. कहा जाये! हीनता की ग्रंथि व्यक्ति के अन्दर होती है! ध्यान साधना करके पहले इस ग्रंथि को जलाना होगा तब चित्त का दोष दूर होगा! अगर सामान जाति वाले दुसरे को कमरा नही देते तो उनमें तो जातिगत हीनता नही आती ! मेरे पिताजी पुलिस वालो और बकीलो को कमरा नही देते थे ! यह उनके अन्दर की हीनता की ग्रंथि है कोई दूसरा व्यक्ति पहले की हीनता ग्रंथि से क्यों प्रभावित होता है? और अपनी हीनता को क्यों बढ़ता है! जहाँ मौका मिले दौड़ते जाओ, दौड़ ही दलितों को आगे निकालेगी! दौड़ प्रतियोगिता में तो मित्र भी दुश्मन की तरह व्यवहार करता है! फिर भी कहा जाता है खेल संस्कृतिक मेल-जोल का उपक्रम है! अपनी हीनता की ग्रंथि को त्यागो किसी दुसरे की हीनता की गर्न्थी से अपनी हीनता की ग्रंथि को उर्जा मत दो ! ध्यान साधना करके पहले इस ग्रंथि को जलाना होगा तब चित्त का दोष दूर होगा!

मन्त्र शक्ति

  दलितों को मन्त्र शक्ति प्राप्त करनी ही होगी! #### मनुवादियों के मन्त्र - शूद्रो के विनाश के लिए - जय श्रीराम स्वयं के स्वास्थ्य के लिए - ॐ ज्ञान शक्ति और कंठ के की मधुरता के लिए- गायत्री मन्त्र पारिवारिक कलेश में स्वयं की स्थिरता के लिए - ॐ जय जगदीश हरे भयभीत होने पर - महाम्रत्युन्जय मन्त्र और हनुमान चालीसा ! आदि #### जागो दलितों सोते मत रहो ! मन्त्र केवल चित्त को शक्ति प्रदान करता हैं ठीक उसी प्रकार जैसे भोजन शरीर को शक्ति प्रदान करता है! जिस प्रकार साथ बैठकर भोजन करने से परिवार में प्रेम और भाई चारा बढ़ता है! ठीक उसी प्रकार एक साथ बैठकर मंत्रो (संकल्पों का स्मरण) का पाठ करने से संगठनात्मक शक्ति बढती है! दलितों को दूसरो के मंदिरों में नही जाना चाहिए इससे अपने समाज की संगठनात्मक शक्ति कमजोर होती है! १. "जय भीम" - शत्रुओ में भय उत्पन्न करता है, विस्तर छोड़ने से पहले 7 बार "जय भीम" का उच्चारण करें, तथा २. अपने परिवार के किसी ऐसे व्यक्ति को याद करें जिससे आपको अटूट प्रेम हो तथा उसने आपके परिवार को समाज में प्रतिष्ठा दिलाई हो ! (चांहे वह मृत्यु को प्राप्त हो चूका हो ...

जस्टिस कर्णन

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  क्यों जस्टिस कर्णन का सिर्फ इसलिए समर्थन करना गलत है कि वे जन्मना दलित हैं अपनी अजीबोगरीब हरकतों के अलावा अगर जस्टिस कर्णन इतिहास में किसी और वजह से दर्ज किये भी जाएंगे तो वह दलितों की असली लड़ाई को कमज़ोर करना ही होगा 29 जून 2017 राहुल कोटियाल  शेयर  ट्वीट  ईमेल  रेडिट  प्रिंट  शेयर  ट्वीट  ईमेल  रेडिट  प्रिंट हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय से रिटायर हुए जस्टिस सीएस कर्णन के नाम कई अजीबोगरीब रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं. वे ऐसे पहले जज हैं जिन्हें पद पर रहते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई. जस्टिस कर्णन ऐसे भी पहले जज हैं जो पद पर रहते हुए लगभग सात हफ़्तों तक फरार रहे और ऐसे भी पहले जज जो फरार रहते हुए ही रिटायर हो गए. काफी समय तक फरार रहने के बाद जब अंततः जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार किया गया तो उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई. न्यायालय ने जब उनकी इस अर्जी को ठुकरा दिया तो उनके कुछ समर्थक इसे जातिवादी फैसला करार दे रहे हैं. यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस कर्णन के मामले को जातिवादी रंग देने की कोशिश की जा रही है. वे ...