चमार और हेला पतित ब्राह्मण हैं --
चमार और हेला पतित ब्राह्मण हैं --
वाल्मीकि ब्राह्मण तो हैं परन्तु पतित ब्राह्मण हैं! ब्राह्मण कभी राजा की स्तुति नही करता है वाल्मीकि ने राजा की स्तुति करके जो पाप किया था उसी का परिणाम है कि वाल्मीकि हेला (राजा के गू को उठाने वाला) होकर पतित ब्राह्मण हो गया! किन्तु यह कलयुग है जोकि ४ लाख ३२ हजार वर्ष का कहा जाता है जिसके मात्र ५ हजार वर्ष ही वितीत हुए हैं! हेला और और चमार दोनो ही मूल रूप से पतित ब्राह्मण हैं! मैं ब्राह्मण शब्द को भाव वाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग कर रहा हूँ जोकि बाद में जाति वाचक संज्ञा हो गयी और इन पतित ब्रह्मणों के कुल ही आगे चल कर हेला और चमार के रूप में जाने गये हैं! यह बाते किसी पोथी को पढ़ने ने से नहीं मिलेगीं समस्त पोथियों को निचोड़ने से मिलेंगी क्योकि दलित/शूद्रो के पास न तो अपना साहित्य है और न ही अपना इतिहास ! सवर्णों की लिखी गयी पोथी से अपना इतिहास तार्किक रूप से निकालना होगा !......
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