वे प्रकट हुए और मालिक बन गए !
वे प्रकट हुए और मालिक बन गए !
आपकी बात सही है परन्तु दलित राजनीति इसको स्वीकार करना नही चाहती! बौद्ध धर्म का विस्तार किये बिना दलित राजनीति सफल नही होगी क्योंकि बौद्धों को ही फिर से शूद्र बना दिया गया जो सेवा कार्य में नही लगे उन्हें ज्यादा उत्पीडित किया गया और अस्पृश्य बना दिया गया शूद्रो की जब तक अपने धर्म में बापसी नहीं होती शूद्र राजनीति सफल नही होगी! झूंठ के साहित्य को गढ़ने में बहुत समय लगता है, और साहित्य को इतिहास बनाने के लिये "प्रकट हुए" जैसी मान्यताओ का सहारा लिया गया ! जैसे रामलला प्रकट होकर आज 70 साल के हो गए और उन्होंने मालिकाना हक़ भी ले लिया !
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