यह पाखंड है या विज्ञान
यह पाखंड है या विज्ञान
एक बात साफ है पृथ्वी तल का कोई भी बिन्दु एक दिवस में १२ राशियों के सामने से गुजर जाता है यह १२ राशियाँ २७.२७ नक्षत्र में विभक्त हैं हर नक्षत्र के ४ खंड है इस प्रकार एक राशि ३० डिग्री की और हर एक नक्षत्र १३.२ डिग्री का होता है! २७.२७ को ४ से गुना किया जाये तो 109.08 होता है! यह पल है या घड़ी इस में गोल मॉल है! आधुनिक समय प्रणाली से गणना की जाये तो एक नक्षत्र के सामने से पृथ्वी के किसी भी बिंदु को गुजरने का समय 54 मिनट है अर्थात किसी नक्षत्र का १/४ (चौथाई) भाग गुजरने में आधुनिक समय के अनुसार 13.4 मिनट लगता है इस प्रकार के 9 खंडो से एक राशि बनती है मतलब एक राशि में २.२५ नक्षत्र का अंश होता है अर्थात 119.8मिनट का समय लगता है! हर नक्षत्र का स्वामी गृह अलग-अलग होता है तथा राशियों का भी स्वामी गृह आलग-अलग होता है! इन ग्रहों व तारा-मंडल से निकलने वाली रश्मियाँ या परवर्तित राशियाँ पृथ्वी पर आकर जातक(जन्मे-व्यक्ति) के चित्त पर अपना प्रभाव डालती हैं! सूर्य एक तारा है जबकि राशियाँ तारो का समूह(तारा-मंडल) है! नक्षत्र समानांतर दूरी पर चुने गए तारे हैं जिनकी रश्मियाँ अन्य नौ ग्रहों से टकराते हुए या सीधे या दोनो प्रकार से, पृथ्वी के तल पर अपना प्रभाव डालती हैं ! इसका असर कितना होता है यह शोध का विषय है ! किन्तु हम सभी जानते है की चन्द्र कलाओ के कारण समुद्र में ज्वार-भाटा आता है जिसको आधुनिक खगोलशास्त्री भी मानते हैं किन्तु इसका मनुष्य पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह खोजा ही जाना चाहिए
में ब्राह्मणों की निंदा उनके दूषित कर्मो का फल -
Ashok Krishn ज्योतिष कहती है राहू-केतु वक्रीय रहते हैं जबकि सूर्य-चन्द्र सीधे गति करते हैं अन्य ग्रह अनियत्रित वक्रीय-सीधी गति करते हैं इसका एक मात्र कारण पृथ्वी को गलत रूप में स्थिर मान कर इसके सापेक्ष अन्य ग्रहों की गति कराने से उत्पन्न हुआ है! यह सकारण भी हो सकता है और अज्ञानता वस भी हो सकता है! फिर भी 90% ज्योतिष की बाते सत्य हैं किन्तु इसके साथ 90% पाखंड जोड़ दिया गया है इस कारण ज्योतिष के विज्ञान को सामान्य वैज्ञानिक बुद्धि का व्यक्ति स्वीकार नही करेगा ! क्योकि ज्योतिष की ९०% सत्यता के ऊपर ९०% पाखंड का लेपन है! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य,शूद्र चित्त के गुण हैं जो जन्म से जातक में होते हैं कितु पुरोहितो ने इन चार गुणों को चार जातियां बना दिया है तथा उन गुणों को जाति बंधन से बांधने के लिए जो पाखंड किया है वह अत्यंत निंदनीय है !
ज्योतिष बरदान या अभिशाप :-
Xxxx ज्योतिष का मूल लाभ तो ख़त्म कर दिया गया है! उसके चारो तरफ बाजारवाद है और सामाजिक विभेद पैदा कर दिया गया है! मैं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर रहा हूँ और मैग्नेटिक वेब से अच्छे तरह से परिचित हूँ! मैं दावे से कह सकता हूँ ज्योतिष की 90% चीजे ठीक हैं! प्रतिभाओ को अवसर प्रदान करने में इसका महत्वपूर्ण लाभ हो सकता है किन्तु इसको केवल जूता लेकर ही लागू किया जाना चाहिए अन्यथा भुला देना अच्छा है !
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