आरएसएस को समझे !
१
विचारक, संग्राहक, प्रचारक, प्रशासक(भक्त) और
सक्रीय समर्थक, निष्क्रिय
समर्थक तथा अवसरवादी समर्थक, यह है आरएसएस का संगठन
!
२
आरएसएस के विचारक बहुत वुद्धिजिवी होते हैं किन्तु वे संगठन में नहीं दिखाई देते, संग्राहक ही उनके
विचारो दोहन करते हैं जो दिखते हैं!
३
संग्राहको की पहली श्रंखला विचारक के रूप में आरएसएस की पहली पंगति में दिखती है, यह मंद-बुद्धि के भीरु लोग कुतर्क में निपूर्ण हैं!
४
प्रचारक मंद-बुद्धि के संगाह्को की दूसरी श्रेणी है कुतर्क की परख न होने के कारण
यह संग्राहको की वाणी ब्रह्मवाणी मान कर प्रचार करते हैं!
५
प्रचारको के लिए ज्ञान का एक मात्र श्रोत संग्राहक ही होते हैं जिनसे यह आजीविका
भी पाते हैं
६
प्रशासक: प्रचारको के बाद अगली श्रंखला है जो "भक्त" के नाम से भी जानी
जाती है- यह जुबान खोर, लतखोर और लट्ठेत होते हैं
७
प्रचारको द्वारा भक्तो की एक बहुत बड़ी श्रंखला तैयार कर दी गयी है कई भक्त इतने
उग्र हो गये है कि इन्होने अपने अलग संगठन बना लिये हैं!
८
अवसरवादी राजनीतिक संगठनों द्वारा संग्रहको को फंडिंग की जाती है- संग्राहक इस
फंडिग का पयोग प्रचारको तथा कुछ भक्तो के लिए करते हैं !
९
संग्राहक, प्रचारक, प्रशासक(भक्त) द्वारा एक समाज की रचना की गयी है जो साम,दाम, भेद और दंड पर आधारित है!
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