हेला
केवल दो वक्त की रोटियों के लिए भरी बरसात में मैले की टोकरी का सारा मैला सर पर उठाना यह एक ऐसी विवशता है, जो किसी भी संवेदनशील मनुष्य को परेशान कर सकती है। लेकिन कैसा हमारा शिक्षित, सहिष्णु समाज और कैसे कथित तौर पर पढ़े लिखे लोग और नकारा सरकारी तंत्र और विशेषकर कलेक्टरों की जमात है, जिनकी आंखों को कुछ नहीं दिखाई देता।
एक कलेक्टर ने कहा कि हम बरसात में पीतल की मटकी इनको उपलब्ध करवाएंगे, ताकि मैला ढोने में परेशानी नहीं हो।
हेला का जीवन
एक कलेक्टर ने कहा कि हम बरसात में पीतल की मटकी इनको उपलब्ध करवाएंगे, ताकि मैला ढोने में परेशानी नहीं हो।
हेला का जीवन
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