मूढ़ की संगत न करें:-
मूढ़ की संगत न करें:-
मूर्खता पूर्ण विषयों पर तर्क-वितर्क करना उच्च कोटि की मूर्खता है किन्तु है मूर्खता ही! ऐसे विषयों को सुने और मुस्कराते हुए निकल जाएँ ! जब कुत्ता बोलने लगे और हाथी उड़ने लगे तो ऐसे-विषयों को कथा-कहानी कहा जाता है जिसके सार पर चर्चा की जाती है नाकि तथ्य पर, जो व्यक्ति कथा-कहानियों के तथ्य पर चर्चा करने पर जोर देता है मूर्ख है! कथा कहानियो के पत्रों और तथ्यों की भौतिक सत्यता पर चर्चा नहीं की जाती है बल्कि उससे निकले सन्देश को ग्रहण किया जाता है अथवा त्याग दिया जाता है! जो मुर्ख कथा-कहानियों को इतिहास समझता है और उनमे भातिक गुणों को खोजता है मूढ़ है! भगवान बुद्ध ने भिखुओ से कहा है कि मूढ़ की संगत न करें !
Himanshumeagie Sharma महाकश्यप ने प्रथम संगीति करके बुद्ध बचनो को तिपिटक में संग्रहीत किया जानते हो क्यों? ताकि आरएसएस वाले भगवान बुद्ध के मुख से अपनी घ्रणित मंशा का दुष-प्रचार न करने लगें! इसका दुष-परिणाम यह हुआ कि हिंदूओ ने बुद्ध विश्व-विद्यालय नष्ट किये और करवाए! जोगेंद्रनाथ मंडल की आत्मकथा कहने वाला, क्या आरएसएस का प्रवक्ता नही है? अपने दिल पर हाथ रख कर अपने से ही पूँछ लो! मित्र मैं मुर्खता पूर्ण चर्चाओ में भाग नही लेता! इसलिए अगला कमेन्ट बहुत सोच-समझ कर करना अन्यथा कोई उत्तर नही आएगा !
Gaurav Sarwan मित्र सरकार संप्रभु होती है, सरकार निर्धारित करती है कि उसकी जनता का जीवन स्तर कैसा होगा! जब सत्ता में बैठे लोग धोखा देते हैं तब विद्रोह, क्रांति और सत्ता-पलट होता है जिसमें भयंकर खून-खराबा होता है! लोकतान्त्रिक देशों ने इस खून-खराबे से बचने के लिए जनादेश की पद्दति अपनाई है! जब सरकार जनविरोधी काम करती है तो जनता उसे बदल देती है इसलिए जनतांत्रिक देश में सरकारों को जन विरोधी काम नही करने चाहिए! "क्या लाये थे? क्या ले जाओगे ?" यह तो सरकारी नीतियाँ है जो किसी को गरीव और किसी को अमीर बना देती हैं! सरकार इनको बदल भी सकती है! क्या समझे ..... ? मैं प्राइमरी पाठशाला का शिक्षक नही हूँ, इंजीनियरिंग कालेज का शिक्षक रहा हूँ! अगर आपको मेरी बात समझ नही आ रही है तो किसी राजनीति विज्ञान के शिक्षक से समझ लेना कि सरकार की औकात कितनी होती है?
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