उर्जा को सही प्रयोग

उर्जा को सही प्रयोग DrRamesh Singh आपकी बात सत्य भी हो सकती है परन्तु 2500 साल पहले कुछ तो था! हो सकता है कचरा ही हो आध्यात्मिकता के जगत में! रहगयी बात वास्तु-कला और लेखन की तो गुप्तकाल में अपने स्वर्णिम रूप में था उसके बाद मुगल काल में, दक्षिण भारत और मध्य भारत में भी उक्त पर जोर दिया गया! बुद्ध के अशोक कालीन जो स्तंभ मिले हैं उनमें लवणता का अभाव है सीधा-सीधा लिख दिया गया है! जो बाद में भी लिखा जाता रहा! हर्ष वर्धन के काल तक तो उत्तर और दक्षिण भारत में बौद्ध दर्शन का ही बोल-बाला रहा है! वैदिक ग्रन्थ (जो अध्ययन से ही कचरे जैसे प्रतीत होते हैं) राज्य की प्राथमिकता में नही थे! राजपूत काल में शैशव और वैष्णो पंथ द्वारा एक दुसरे को नीचा दिखने के चक्कर में कचरे की छटनी हुई, जिससे उपनिषद, ब्राह्मण ग्रन्थ और पुराणों निकले और इनको विस्तार दिया गया! राज्य का साथ मिलने के कारण पुरोहितो और पंडों की बड़ी फ़ौज तैयार हो गयी! साधना एक ऐसी कला है जिसके अभ्यास से विज्ञान निकलता है जो आभ्यास नहीं मात्र अध्ययन करता है तो केवल मूढ़ता निकलती है! जिन भिक्षुओ ने शैशव और वैष्णो पंथ अपना लिया वे ही ब्रह्मचारी, नागा, अघोरी और साधू बन गए! इस बात पर सभी एक मत हैं कि वैदिक संस्कृति के ऋषि और ब्राह्मण गृहस्त थे! सन्यासी और ब्रह्मचारी की परम्परा बुद्ध के बाद आयी! इसलिए बहुत अधिक आक्रोशित होने की आवश्यकता नही है, इतिहास को स्वीकार करो या त्याग दो बदला कुछ नही जा सकता है! भारत की संस्कृति हजारो साल से मिश्रित संस्कृति रही है! संविधान सभा यह जानती थी इसलिए संविधान में मिश्रित संस्कृति को स्वीकार किया गया है! कुछ आसामाजिक तत्व पूँजी के लोभ के लिए नाना प्रकार के उत्पात मचाये हुए हैं ताकि जनता मूल विषयों को न उठाये, आज प्याज 200 रुपये किलो और डीजल 93 रूपये लीटर है परन्तु चर्चा सिर्फ कृषि(मंडी) कानून की हो रही है! आस्तिकता और नास्तिकता पर जोर देने से अच्छा है! आगामी आवादी(नौनिहाल और किशोरों) के लिए खुली प्रतियोगिता के संसाधनों और सामान पौष्टिक आहार दिलाने हेतु चर्चा की जाये और सरकार को इन विषयों के लिए झुकाया जाये! जब जन्म से कोई ब्राह्मण नही होता तो कोई जन्म से लाला कैसे हो सकता है ........................पूंजीवाद के उत्तराधिकारवादी कानून समाप्त किये जाएँ, जो श्रम करेगा वही राज करेगा! प्राइवेट कंपनियों में भी बोर्ड आफ डायरेक्टर प्रतियोगिता पास करके आयेंगे शेयर होल्डर नही होंगे आदि! क्या समझे ? उर्जा को सही जगह लगाया जाये ! नमो बुद्धाय, सबका मंगल हो !

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