सवालों के जबाब
Ramprasad Sikandar मित्र भगवान बुद्ध ने कहा है कि भीख मांगने से कोई भिक्षु नही बन जाता, (अर्थात हर भीख मांगने बाला भिखारी नहीं होता) ......... ढाई आखर पढ़े बिना कोई ग्यानी नही बनता ..........
Ramprasad Sikandar मित्र आपका कमेन्ट पढ़ कर मैं चक्कर में पड़ गया अंध भक्त कौन है? आस्तिकता में जिसकी आस्था है वह अंध भक्त है तो जिसकी नास्तिकता में आस्था है वह भी अंधभक्त ही है! ज्ञानी तो वह है जो कबीर के कहे अनुसार "....सार-सार को गहि रहे थोथा दे उड़ाए..." !
मित्र आपकी भाषा पर पकड़ बहुत कमजोर है! आप बात अधर्म की करते हो और शब्द "धर्म" प्रयोग करते हो! धारण करे सो धर्म है वर्ना कोरी बात! पेट का लीवर कहे मुझे आजादी चाहिए क्या दी जा सकती है? लीवर को शरीर से बाहर निकाला जा सकता है! लीवर का धर्म है शरीर के लिए बंधन में रहे परन्तु लीवर के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री को आजादी है कि वह खून के साथ मिलकर किसी अन्य अंग की संरचना में शामिल हो जाये या शारीर से बहार निकल जाये! धर्म बंधन है, आजादी भी धर्म है, पहले समझो तो धर्म क्या है और धारण क्या करना है और छोड़ना क्या है!
Santosh Agrawal Seondha मूर्ख और पाखंडी लोग, समाज को जातियों और धर्मो में बांटते रहे और अनपढ़ कहते रहे खून एक है जबकि वैज्ञानिक सत्य है कि खून आठ प्रकार का होता है! मित्र दिल बहलाने को तुम्हारा लेख अच्छा है परन्तु यह जख्मी दिल की दवा नही है! पूंजी-पतियों का दलाल मोदी है उसको आंबेडकर के समतुल्य रखते आपको शर्म नही आयी! मोदी पूँजी पतियों के लिए दलाली कर रहा है और तुम जैसे लोग मात्र दो रूपये के लिए मोदी की दलाली करते हो! दिन भर इन मूर्खता पूर्ण लेखो को कट-पेस्ट करते रहते हो !
Mahendar Arya मित्र बुद्धि को विराम दो कल किसान आन्दोलन में कूदना है, पाकिस्तान में फिर कभी कूद लेना! ........कौन जाने, तुम आरएसएस वाले जल्दी ही मंगल पर दंगल न कर बैठो अमेरिका के साथ! क्योंकि हिन्दू धर्म आतंकवादियों का धर्म है; इन में प्रेम और भाईचारा नही है, ब्राह्मण, क्षत्रिय बैश्य और शूद्र के नाम पर लड़ते ही रहते हैं! ऋग्वेद से लेकर आज तक आप लोगों के सभी धर्म-ग्रन्थ युद्ध, शोषण, अपहरण और बलात्कार से भरे पड़े हैं! दुर्भाग्य तो यह है कि आप लोग उन्हें धर्म-ग्रन्थ कहते हो! प्रमुख यह है कि हिन्दू धर्म के सभी देवी देवता शस्त्रधारी और ग्रंथो के अनुसार छिनरा और बलात्कारी भी हैं !
सन २०१४ के चुनाव में कांग्रेस अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचारो के आरोपो और गैस-सिलेंडर की संख्या १२ से घटाकर 8 कर देने के कारण हारी थी क्योंकि कांग्रेस ने जीवन की मूलभूत आवश्यकताओ में समस्या पैदा कर दी थी!
सन 2019 के चुनाव में कांग्रेस सेकुलर ऐजेंडा छोड़कर हिन्दू ऐजेंडा पर काम करने लगी थी इस कारण सेकुलर वोट वांट गया! कांग्रेस के भगवाधारी नही चाहते कि कांग्रेस सेकुलर पार्टी बनी रहे!
आज भारत की सेकुलर अवाम अनाथ हो गयी है! कांग्रेस को सत्ता में लौटना है तो
कांग्रेस को अपनी पुरानी पहचान "सेकुलर" को, शक्ति के साथ सेकुलर ऐजेंडे पर लौटना ही होगा!
Mahendar Arya जय श्री राम और जय बाल्मीकि कभी नही हो सकता है क्योकि युद्ध में जय केवल एक की ही होती है! रामचन्द्र की सेना और बाल्मीकि के शिष्यों में युद्ध हुआ था जिसमें महर्षि बाल्मीकि की जय हुई थी! युद्ध का विषय था कि आश्रम की भूमि राज्य के अधीन नही होगी! आतंकी रामचन्द्र के शासन में आश्रम की भूमि पर राज्य कब्जा कर रहा था (जैसा आजकल मोदी-शासन में किसानो की भूमि को हथियाकर षड्यंत्र पूर्वक अडानी और अम्बानी को दी जा रही है) आश्रम की भूमि पर कब्ज़ा करने के लिए महर्षि संबुक की हत्या कर दी गयी थी! महर्षि बाल्मीकि ने अपने शिष्यों को पहले ही युद्ध के लिए तैयार कर दिया था जिसमें रामचन्द्र की सेना हारी! इसलिए केवल जय महर्षि बाल्मीकि कहो, मनुवादियों के चक्कर में महर्षि बाल्मीकि की प्रतिष्ठा को धूमिल मत करो, अगर वास्तव में तुम वाल्मीकि समाज से हो तो !
Abhinder Gautam कमल कीचड़ में खिलता है और भगवान बुद्ध के किसी श्रावक ने भिक्षु द्वारा कमल के अधिग्रहण को भिक्षु नियमो के विपरीत कहा था! टोकने पर भिक्कू को बोध हुआ कि उससे अपराध हुआ है, तदनुरूप मैं भी कीचड़ और कमल से दूरी बना के रहता हूँ, कमल से उलझोगे तो कीचड़ में फसोगे ही !
महार शब्द मार से बना है, या यूं कहो चमार से बना है! जब पांच सौ चमारो ने पेशवा की 28 हजार की सेना को मार डाला तब उनकी अलग पहचान, लड़ाका-समुदाय के रूप में होने लगी और वे महार कहलाये क्योंकि चमार बुद्ध द्वारा बताये गए अहिंसा के मार्ग पर चलने बाला समुदाय था!
Abhinder Gautam सनातन "शब्द" तो आधुनिक भारत की देन है, जोकि आर्य-समाज के विरोध में उत्पन्न हुआ था जिसकी अवधारणा थी कि हम आर्य समाज के किसी भी सुधार को स्वीकार नही करेंगे! आर्य-समाज के गठन के आठ साल बाद ही महर्षि दयानन्द की हत्या करके, सनातन-धर्म, आर्य-सनातन-धर्म हो गया और आर्य-समाज की छाती पर मूंग दलने लगा! इस प्रकार आर्य-समाज घोर राष्ट्रविरोधी और उत्पाती धर्म हो गया ...... मेरा मुंह न खुलवाओ तो ही अच्छा है !
Abhinder Gautam मित्र, फिर तो मुझे आपके लिए बुद्धि शुद्धि यज्ञ करना पड़ेगा क्योंकि यह सर्वविदित है कि बुद्ध ज्ञान मार्गी हैं इनका भक्ति से कोई लेना-देना नहीं है! आपको इतना भी पता नही है तो अपने नाम में गौतम लगाना छोड़ दो! कोई कितने भी लबादे ओढ़ ले, मेरी नजर से बच नही सकता, मैं आरएसएस के छदम मनुवादियों को पकड़ा ही लेता हूँ! अगला कमेंट बहुत सोंच-समझ कर करना क्योंकि आरएसएस के भक्तो को मैं ब्लाक कर देता हूँ !
कर्म-कांड मात्र सामाजिक-नाटक
Badan Singh Bauddh भाई मेरे, शादी सम्बन्धी कोई भी कर्म-कांड मात्र एक नाटक है! नाटक मनोरंजन के लिए होता है इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि फेरे पांच लिए जा रहे हैं या सात या केवल वचन दिया जा रहा है! संतति की उत्त्पति के लिए यह उद्घोषणा है इस नाटक को कितना ही लम्बा कर दो या छोटा कोई फर्क नही पड़ता है! उदाहरण - सुन्नी की शादी मौलवी कराता है जबकि शिया की शादी में मौलवी की जरुरत नही होती, दोनों ही शादियों में एक बात समरूप है वह यह है जब-तक दोनों (स्त्री-पुरुष) शारीरिक सम्बन्ध नही बना लेते हैं, न निकाह-परवान चढ़ता है और न ही दोनों को पति-पत्नी माना जाता है! मैं कई बार कहता हूँ मनुवाद के उलटे खड़ा हो जाना आंबेडकरवाद नही है, ऐसे विषयों को बहुत अधिक अहमियत देने की आवश्यकता नही है! जिन विषयों पर चर्चा हो वह इस प्रकार के हों, कि दलित-जाति में कहाँ प्रतिभाएं उत्पन्न हुई हैं? क्या उनकी प्रगति में कोई बाधा तो नही आ रही है! सात साल का बच्चा अपनी प्रतिभाओ का प्रदर्शन करने लगता है उसको उपयुक्त वातावरण मिलेगा तो प्रतिभा विकसित होकर दलित समाज का उत्तथान करेगी अन्यथा समाप्त हो जाएगी! शहरी और ग्रामीण दलित मात्र इसलिए दलित है क्योंकि वह अपने समाज में उतपन्न हुई प्रतिभाओ को संरक्षण प्रदान नही करता है और अनावश्यक चर्चो को प्रमुखता देता है! दूसरी ओर मनुवाद दलितों को ऐसे विषय देता रहता है ताकि वे अन-उपयुक्त विषयों की चर्चा में उलझे रहें और कभी अपने समाज की उन्नति के लिए एक मत होकर काम न करें! मनुवाद के षड्यंत्र से बाहर निकलने पर ही समाज की उन्नति होगी, कर्म-कांड मात्र सामाजिक-नाटक है इनपर अधिक चर्चा करना समय की बर्बादी है जो समय को बर्बाद करता है समय उसको बर्बाद कर देता है फिर चाहें वह व्यक्ति हो या समुदाय ! नमो-बुद्धाय, सबका मंगल हो !
मित्र, तिपिटक बुद्ध का है, मैंने अधिकांश तिपिटक देखा है, उसमें सिद्दार्थ के बारे में कुछ नही मिलता है! अठ्ठा-कथाओ में मिलता है जो पाली-भाषा में होते हुए भी तिपिटक का अंग नही मानी जाती हैं! बुद्ध के समकालीन जैन ग्रंथो और उपनिषद-वादियों के मिले-झूले साहित्य से सिद्दार्थ की जीवन गाथा निकलती है! इस TV सीरियल में अधिकांश साहित्य पर आधारित है जो सत्य ही होगा ऐसी मैं आशा करता हूँ! किन्तु ध्यान-साधन और आर्य अष्टांगिक मार्ग पर मेरी स्वयं की पकड़ है अनुभव के आधार पर इसलिए मैं इतना ही कह सकता हूँ 90% सीरियल ठीक है! आप अपनी विचारधारा को बनाये रखने के लिए स्वतंत्र है किन्तु मैं स्वयं को आस्तिकता और नास्तिकता से मुक्त पाता हूँ इसलिए सीरियल में दर्शाये चित्रांकन को इतिहास मानने में कोई आपत्ति नहीं है !
Vinod Kumar वेदों में जो उत्तम था वह उपनिषद में छान लिया गया, कचरा और पाखंड ब्राह्मण ग्रंथो में चला गया! पंडित का ज्ञान उधार का होता है अर्थात रट्टू तोता होते हैं! पंडित श्रमण या ब्राह्मण नही होता! ग्रंथो से लदा हुआ एक गधा होता है, जिसमें उधार के ज्ञान का अहंकार होता है! जबकि स्वयं के ज्ञान से मैत्री और करुणा आती है ! पंडित का ज्ञान बाँटने से चुक जाता है इसलिए पंडित ज्ञान को छिपाकर रखता है जबकि ब्राहमण और श्रमण का ज्ञान बाँटने से बढ़ता है! श्रमण और ब्राह्मण तप से बनते हैं जबकि पंडित रट के बनते हैं ! श्रमण और ब्राह्मण दोनों ही संस्कृति में पंडित शब्द सामान्य रूप से प्रयोग किया जाता था दोनों समकालीन संस्कृति रही हैं इसलिए यह शब्द एकाधिकारवादी नहीं है!
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