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Showing posts from June, 2020

किताबी या गैर किताबी ज्ञान

किताबी या गैर किताबी  ज्ञान  अगर आप का इशारा कुरान की ओर है, तो मुझे दुःख है आपको अभी कुरान की ABCD नही पता है अन्यथा आप यह प्रश्न ही न उठाते! कभी १०० लाइने लिखकर देखो फिर १०० लोगो को पढ़ा कर देखो ! जिस भावना से आपने १०० लाइने लिखी होंगी पढ़ने बाले उसका सत्यानाश कर देंगे ! दूसरा प्र योग करो किसी वस्तु विशेष के सामने १०० लोगो को खड़ा कर दो कुछ समय के लिए फिर उनसे कहो इस पर १००-१०० लाइने लिखो ! जब वे लिखेंगे तो उन में 90% समानता होगी ! मैं इतना ही कहना चाहता हूँ, वेद हों, सत्यार्थ प्रकाश हो या तिपिटक हो या कुरान हो ! दूसरे समाज के साथ का मतभेद समझ आता है किन्तु एक किताब वाले समाज का आपस में झगड़ा बना रहता है तो यह किताबे सिखा क्या रहीं है? किताब दोष पूर्ण है या पढ़ने बाला दोष पूर्ण है या पढ़ने बाला दोष पूर्ण है, कुछ तो गड़बड़ है! इसी लिए मैं कहता हूँ एक उम्र के बाद किताबो का परित्याग कर देना चाहिए जैसे बच्चा माँ का दूध पीना छोड़ देता है! जब दूध के साथ अन्य चीजे लेता और समझता है तब उसकी बुद्धि का विकास होता है शरीर का विकास होता है ! जो बच्चे माँ के पास ही पड़े रहते हैं, न तो उनके शरीर का ...

हिंदूओ को रजनीश क्यों नही पसंद हैं ?

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https://www.youtube.com/watch?v=z4j-_IGpY4A

नास्तिकों की भावनाएं भी आहत होती हैं।

नास्तिकों की भावनाएं भी आहत होती हैं। ×××××××××××××××××××××××××× (1) आस्तिक लोग बात-बात में कहते रहते हैं कि हमारी भावना आहत हुई। कोई फिल्म बनी तो भावना आहत हुई। किसी ने किताब लिखी तो भावना आहत हुई। किसी का नाम पार्वती खान है तो भावना आहत हुई। ऐसी कैसी है आपकी भावना जो बात-बात में आहत होती रहती है ? (2) भावनाएं तो नास्तिक की भी होती है। हमारी भावनाएं भी आहत होती है। जब किसी मंदिर में किसी नारी को देवदासी बनाकर उसका आजीवन शोषण किया जाता है तब हमारी भावनाएं भी आहत होती है। (3) आस्था के नाम पर दूध और घी जैसे कीमती द्रव्यों का व्यय होता है और मंदिर के बाहर भूखे बच्चें भीख मांग रहे हैं और भगवान को 56 भोग लगाएं जाते हैं तब हमारी भावनाएं भी आहत होती है। (4) संविधान में बताये गये सिद्धांतों के विरुद्ध आप अंधविश्वास को बढ़ावा देते हो और सांसद की उम्मीदवारी का फॉर्म भरते वक्त घड़ी में 12.39 के समय का मुहूर्त देखते हो तब हमारी भावनाएं भी आहत होती है। (5) रथ यात्रा हो या कॉवड़ यात्रा आप रोड पर चक्का जाम कर देते हो तब हमारी भावनाएं भी आहत होती है। माईक पर धार्मिक ध्वनि प्रदूषण से हम परेशान हैं लेकिन...

jati bhed ka vinash

https://www.youtube.com/watch?v=JcgG4ZEuIss  

मिथ्या जगत में क्या सत्य और क्या असत्य ?

मिथ्या जगत में क्या सत्य और क्या असत्य ? बात बड़े और छोटे की नही है! बात सत्य और असत्य की है! कहा जाता है अज्ञानी बहुत बोलते हैं, ज्ञानी शब्दकोष को बहुत अल्प समझते हैं कह ही नही पाते! एक तीसरे दर्जे के लोग भी हैं, जितना जानते हैं उतना कह देते हैं वे ज्ञानी नही होते वे अज्ञानी भी नही होते हैं! असीम करुणा से भरपूर होते हैं अच्छा-अच्छा कह देते हैं कड़वा-कड़वा छिपा देते हैं! कुछ मुंह-फट होते हैं, बस जान गये तो कह देते हैं! भाई मैं इन तीनो में से कोई भी नही हूँ ! मैं तो सीधा-सादा बकी ल हूँ मेरा प्रोफेशन ही ऐसा है साबूत पर संदेह पैदा करना, जब साबूत पर संदेह पैदा हो जाता है तो असत्य भागने लगता है और सत्य प्रकट होने लगता है! मैं न तो सत्यार्थ प्रकाश को सही कहता हूँ न गलत, मैं तो केवल संदेह पैदा करता हूँ ! जो नही हो सकता वह नही होगा, वेदों की बहुत टीकाएँ उपलब्ध है आज ऑडियो और टेक्स्ट फॉर्म में आप सुन और पढ़ सकते हो ! जब आप सुनो और देखोगे तो मेरे सभी संदेह को सत्य पाओगे ! करीबी १० घंटे की ऋग्वेद ऑडियो टीका है आप भी सुन लो ! १०वा मंडल सुनते ही ऋग्वेद पूरा समझ आजायेगा !

चार वाक्य & किताबें मेरी जान की दुश्मन

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SATYAM मुझसे चार वाक्य समझ नही आते: "सनातनी-हिन्दूवाद"; "आरएसएस का राष्ट्रवाद"; "वेदों की प्रमाणिकता"; "भाजपा का स्त्री प्रेम"! बजाते रहो मुझसे पढ़ने को अब न कहना, किताबें मेरी जान की दुश्मन, करती मुझ पर अत्याचार रही, लिखने वालो बचकर रहना, अब तुम्हारी खैर नही 

भारत की मजबूर और रोजगार नीति

भारत की मजबूर और रोजगार नीति  भारत जब तक WTO से बहार नही आता, वह किसी कंपनी का अधिग्रहण नही कर सकता है! MSME को विस्तार देते हुए वह दूसरी योग्य कम्पनी को अधिग्रहण में मदद कर सकता है क्योंकि यह सामान्य रोजगार का भी मामला है! वैश्य समाज में सीधे-सादे और आलसी लोग होते हैं उन्हें उत्पादन और रोजगार से कोई लेना देना नहीं होता है! उनकी रुचि केवल लाभ में होती है! यदि उनको कोई लाभ की गारंटी दे दे तो वे कम्पनी को आगे भी जारी रख सकते हैं इसलिए मैंने कम्पनी के योग्य कर्मचारियों को कंपनी बनाने पर जोर दिया है क्योंकि कम्पनी को लाभ में कर्मचारी और मीडिल लेवल के प्रबंधक ही ले जाते हैं! अगर ऐसे लोग कंपनी बनाते है तो निश्चय ही वह सब के लिए हितकर होगी !

दलित नेताओ पर संदेह -

दलित नेताओ पर संदेह - दलित शासन आने वाला है एक बात स्वीकार कर लें! दूसरी बात आपके द्वारा उठाई गयी आशंकाओ की है तो इतना ही कहूँगा यह क्रमिक विकास का क्रम है जो लगातार जारी है! एक उदाहरण से कहना चहुँ तो इतना ही कह सकता हूँ कि आज हमारे दादा जी किसी काम के नही हैं एक कोने में पड़े खाँसते रहते है किन्तु समाज में मेरा बहुत मान है! यह शोध का विषय है कि मेरा मान मेरी परवरिश उपलब्ध समाज के कारण है जो दादा जी के संघर्ष का परिणाम है! इसलिए मैं आपकी इस दलील को नही मानूंगा कि दलित नेताओ ने समाज के विकास में कोई योगदान नही दिया है! यह बात हो सकती है कि दलित नेताओ ने अपेक्षित योग दान न किया हो किन्तु उन्होंने अपने मानवीय विकारो के रहते हुए समाज के लिए सर्वोतम योग दान दिया है!

जमीन किसी के बाप की नही है

जमीन किसी के बाप की नही है सब सुनी-सुनाई बाते हैं, मैं इस विषय में ज्यादा बात नही कर सकता ! बस इतना जानता हूँ लम्बे समय तक शांति बनाये रखने के लिए हर कीमत अदा की जानी चाहिए! औरतो की तरह सुबह-शाम का झगड़ा मर्दो को शोभा नही देता! भारत मर्दो और बुद्धिजीवियों का देश रहा है यहाँ सत्ता के शीर्ष पर ब्राह्मण क्षत्रिय और शूद्र रहे हैं! यहाँ कभी भी बनिए को सत्ता के शीर्ष पर नही बैठाया गया है क्योकि आचार्य चाणक्य जैसे कतिपय बुद्धिजीवी वैश्य को सत्ता के शीर्ष पर बैठने के कभी पक्ष में नहीं थे इसलिए उनको कभी भी सत्ता नही दी गयी! आजाद भारत में आरएसएस की गलत नीतियों के कारण एक बनिये को देश का प्रमुख बना दिया गया और उसने पूरा देश बेंच दिया है! पूरे देश में कोलाहल है और सीमा पर अशांति है ! मैं पुनः कहता हूँ जमीन यही रह जाएगी यह किसी के बाप की नही है! देश की शान्ति की कीमत पर सीमा विवाद नही खड़ा किया जाना चाहिए! निपटाना है तो एक बार में निपटा दो यह बनिया गीरी करके शांति का मोल-भाव नही किया जाना चाहिये!

भारत चीन सीमा विवाद

भारत चीन सीमा विवाद अबतक की खोज में मैं कुछ दूसरी कहानी ही पाता हूँ! चीन और नेपाल सीमा पर भाजपा की "खूंटा गाडो" की नीति ही सीमा विवाद का मुख्य कारण है ! पेट्रोलिंग के दौरान पड़ोसी देशो के सीमा सुरक्षा बल एक निश्चित सीमा के अन्दर तक पेट्रोलिंग करते रहे हैं ! जैसे चीन सीमा पर बताया जाता है कि वहां पर ८ फिंगर के रूप में चिन्हित एरिया में भारत एक से लेकर आठ फिंगर तक पेट्रोलिंग करता था इसके उलट चीन आठ से लेकर एक फिंगर तक पेट्रोलिंग करते थे ! भाजपा की साम्राज्यवादी नीति के कारण चीन ने फिंगर चार से आगे जाने पर रोक लगा दी है! अगर सत्य यही है तो मेरी नजर में भाजपा देश के अन्दर और बाहर अपनी विश्वासनीयता खो चुकी है जिसके कारण पडोसी देशो के साथ सीमा पर विवाद उत्पन्न हो रहा है ! देशा और विश्व की शांति के लिये भाजपा को सत्ता से विदा किया जाना जरूरी हो गया है क्योंकि जमीन किसी के बाप की नही होती न व्यक्ति की न देश की, विश्व शांति प्रमुख है!

ध्यानी की ज्ञान-इन्द्रियां ज्यादा सक्रीय होती हैं ---

ध्यानी की ज्ञान-इन्द्रियां ज्यादा सक्रीय होती हैं --- ध्यान में पारंगत व्यक्ति की सभी इन्द्रियां सामान्य व्यक्ति से ज्यादा सक्रीय होती हैं वह आने वाले हर खतरे का पूर्व आभास करने में सक्षम होता है! इसलिए वह उन स्थितियों को टाल देता है! एक चीज स्पष्ट कर दूं मैं जो कुछ कह रहा हूँ वह केवल ध्यान-साधन से जुड़े लोगो पर लागू होता है! भक्तियोग और पुरोहित पंडो पर लागू नहीं होता है, वे तो उसी प्रकार जड़-इन्द्रिय वाले बने रहते हैं ! इसीलिए ध्यान-साधना से जुड़े लोगो को ज्ञान योगी भी कहा जाता है क्योकि उनकी ज्ञान इन्द्रियां ज्यादा सक्रीय हो जाती हैं! कर्म -इन्द्रियां तो अखाड़े में ही सशक्त होती हैं! इसलिए सुरक्षा की बात करोगे तो ध्यान-साधना से जुड़ा व्यक्ति अपनी सुरक्षा करने में सक्षम होता है! दूसरे के पापो को वह अपने सिर नही लेता, कुछ ले भी लेते हैं तो वे जिसकी मदद करते हैं उसके पापो को भी भरते हैं!

शिक्षिका अनामिका शर्मा की कहानी

पत्रकार- अनामिका, आप एक साथ 25 स्कूलों मे नौकरी एक ही समय पर कैसे मैनेज करती थी ? अनामिका - एक महीने मे 25 दिन स्कूल खुलते है तो मै रोज एक स्कूल जाती थी और छु ट्टी लिखकर रजिस्टर मे रख आती थी। पत्रकार - प्रिंसिपल कुछ बोलता नही था ? अनामिका - वो 24 दिन की छुटटी का 10000 लेते है। पत्रकार - 25 सकूलो मे नियुक्ति कैसे होती गयी ? अनामिका - जिस स्कूल मे नियुक्ति हुई थी बीएसए मुझे प्यार करने लगा उसी ने मुझे 25 स्कूलों मे नौकरी दी और कहा कि एक महीने मे एक स्कूल मे एक ही दिन जाना होगा। पत्रकार - आपको तनख्वाह कितनी मिलती थी ? अनामिका- एक स्कूल से 45000 पत्रकार - आगे क्या प्लान था ? अनामिका- 69000 शिक्षकों की भर्ती का रिजल्ट आ जाता तो मै 50 जिलो मे और नौकरी करने वाली थी पत्रकार - इतनी हिम्मत आई कहाँ से ? अनामिका - जब सरकार भृष्टाचार के लिए ही हो तो हर काम संभव है। पत्रकार- फिर पकङ कैसे गयी ? अनामिका - एक जिले बीएसए MC निकला वो रिटायर होने वाला है उसको लाक डाउन मे समय से पैसा नही दी तो उसने हरकत कर दी। पत्रकार - कया और जिलों मे भी ऐसी टीचर है ? अनामिका - बहुत टीचर है, बीएसए हर टीचर से हर महीने 10-15...

भिक्षु और भिखारी में अंतर

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भिक्षु और भिखारी में अंतर  भिक्षा के कुछ नियम हैं, जिस व्यक्ति के पास जो कुछ भी हो वह उसका दान कर देता है, उसके पश्चात् आध्यात्मिक ज्ञान पर चलते हुए भिक्षा से अपने शारीर का पोषण करता है तथा संग्रह नही करता! इस कार्य में इतनी सुचिता रखता है कि अगले समय का भोजन भी संग्रह नही करता! पूर्णतया प्राकृतिक चर्या धारण करता है किन्तु किसी की आधीनता स्वीकार नही करता! भगवान बुद्ध ने वर्षावास को छोड़ कर तीन दिन से अधिक एक स्थान पर रुकने को वर्जित किया है! भिक्कू को चलते ही रहना है रुकना नहीं है न किसी के घर में न विहार में ! आजकल तो सेठो के माकन में रुकते है या विहार में और इच्छा अनुसार पकवान बनवाकर खाते है! ऐसे लोग न तो भिक्षु की चर्या धारण करते हैं न ही उनको कोई आध्यत्मिक लाभ होता है ! भिक्षु होने के लिए पहले सर्वस्व का त्याग जरुरी है, भिखारी होने के लिए नहीं ! जो बिना दान किये मांगता है वह भिखारी है जो सर्वस्व दान करके शरीर का पोषण करने के लिए मांगते हुए ध्यान-साधना का कार्य करता है भिक्षु है! Kamlesh Kumar Mittra   बहुत जटिल विषय है ! 1 Edit or delete this Like  ·  Reply  ...