जमीन किसी के बाप की नही है

जमीन किसी के बाप की नही है

सब सुनी-सुनाई बाते हैं, मैं इस विषय में ज्यादा बात नही कर सकता ! बस इतना जानता हूँ लम्बे समय तक शांति बनाये रखने के लिए हर कीमत अदा की जानी चाहिए! औरतो की तरह सुबह-शाम का झगड़ा मर्दो को शोभा नही देता! भारत मर्दो और बुद्धिजीवियों का देश रहा है यहाँ सत्ता के शीर्ष पर ब्राह्मण क्षत्रिय और शूद्र रहे हैं! यहाँ कभी भी बनिए को सत्ता के शीर्ष पर नही बैठाया गया है क्योकि आचार्य चाणक्य जैसे कतिपय बुद्धिजीवी वैश्य को सत्ता के शीर्ष पर बैठने के कभी पक्ष में नहीं थे इसलिए उनको कभी भी सत्ता नही दी गयी! आजाद भारत में आरएसएस की गलत नीतियों के कारण एक बनिये को देश का प्रमुख बना दिया गया और उसने पूरा देश बेंच दिया है! पूरे देश में कोलाहल है और सीमा पर अशांति है ! मैं पुनः कहता हूँ जमीन यही रह जाएगी यह किसी के बाप की नही है! देश की शान्ति की कीमत पर सीमा विवाद नही खड़ा किया जाना चाहिए! निपटाना है तो एक बार में निपटा दो यह बनिया गीरी करके शांति का मोल-भाव नही किया जाना चाहिये!

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