भारत की मजबूर और रोजगार नीति

भारत की मजबूर और रोजगार नीति 

भारत जब तक WTO से बहार नही आता, वह किसी कंपनी का अधिग्रहण नही कर सकता है! MSME को विस्तार देते हुए वह दूसरी योग्य कम्पनी को अधिग्रहण में मदद कर सकता है क्योंकि यह सामान्य रोजगार का भी मामला है! वैश्य समाज में सीधे-सादे और आलसी लोग होते हैं उन्हें उत्पादन और रोजगार से कोई लेना देना नहीं होता है! उनकी रुचि केवल लाभ में होती है! यदि उनको कोई लाभ की गारंटी दे दे तो वे कम्पनी को आगे भी जारी रख सकते हैं इसलिए मैंने कम्पनी के योग्य कर्मचारियों को कंपनी बनाने पर जोर दिया है क्योंकि कम्पनी को लाभ में कर्मचारी और मीडिल लेवल के प्रबंधक ही ले जाते हैं! अगर ऐसे लोग कंपनी बनाते है तो निश्चय ही वह सब के लिए हितकर होगी !

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