मिथ्या जगत में क्या सत्य और क्या असत्य ?



मिथ्या जगत में क्या सत्य और क्या असत्य ?

बात बड़े और छोटे की नही है! बात सत्य और असत्य की है! कहा जाता है अज्ञानी बहुत बोलते हैं, ज्ञानी शब्दकोष को बहुत अल्प समझते हैं कह ही नही पाते! एक तीसरे दर्जे के लोग भी हैं, जितना जानते हैं उतना कह देते हैं वे ज्ञानी नही होते वे अज्ञानी भी नही होते हैं! असीम करुणा से भरपूर होते हैं अच्छा-अच्छा कह देते हैं कड़वा-कड़वा छिपा देते हैं! कुछ मुंह-फट होते हैं, बस जान गये तो कह देते हैं! भाई मैं इन तीनो में से कोई भी नही हूँ ! मैं तो सीधा-सादा बकील हूँ मेरा प्रोफेशन ही ऐसा है साबूत पर संदेह पैदा करना, जब साबूत पर संदेह पैदा हो जाता है तो असत्य भागने लगता है और सत्य प्रकट होने लगता है! मैं न तो सत्यार्थ प्रकाश को सही कहता हूँ न गलत, मैं तो केवल संदेह पैदा करता हूँ ! जो नही हो सकता वह नही होगा, वेदों की बहुत टीकाएँ उपलब्ध है आज ऑडियो और टेक्स्ट फॉर्म में आप सुन और पढ़ सकते हो ! जब आप सुनो और देखोगे तो मेरे सभी संदेह को सत्य पाओगे ! करीबी १० घंटे की ऋग्वेद ऑडियो टीका है आप भी सुन लो ! १०वा मंडल सुनते ही ऋग्वेद पूरा समझ आजायेगा !

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