ध्यानी की ज्ञान-इन्द्रियां ज्यादा सक्रीय होती हैं ---



ध्यानी की ज्ञान-इन्द्रियां ज्यादा सक्रीय होती हैं ---

ध्यान में पारंगत व्यक्ति की सभी इन्द्रियां सामान्य व्यक्ति से ज्यादा सक्रीय होती हैं वह आने वाले हर खतरे का पूर्व आभास करने में सक्षम होता है! इसलिए वह उन स्थितियों को टाल देता है! एक चीज स्पष्ट कर दूं मैं जो कुछ कह रहा हूँ वह केवल ध्यान-साधन से जुड़े लोगो पर लागू होता है! भक्तियोग और पुरोहित पंडो पर लागू नहीं होता है, वे तो उसी प्रकार जड़-इन्द्रिय वाले बने रहते हैं ! इसीलिए ध्यान-साधना से जुड़े लोगो को ज्ञान योगी भी कहा जाता है क्योकि उनकी ज्ञान इन्द्रियां ज्यादा सक्रीय हो जाती हैं! कर्म -इन्द्रियां तो अखाड़े में ही सशक्त होती हैं! इसलिए सुरक्षा की बात करोगे तो ध्यान-साधना से जुड़ा व्यक्ति अपनी सुरक्षा करने में सक्षम होता है! दूसरे के पापो को वह अपने सिर नही लेता, कुछ ले भी लेते हैं तो वे जिसकी मदद करते हैं उसके पापो को भी भरते हैं!

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