दलित नेताओ पर संदेह -

दलित नेताओ पर संदेह -

दलित शासन आने वाला है एक बात स्वीकार कर लें! दूसरी बात आपके द्वारा उठाई गयी आशंकाओ की है तो इतना ही कहूँगा यह क्रमिक विकास का क्रम है जो लगातार जारी है! एक उदाहरण से कहना चहुँ तो इतना ही कह सकता हूँ कि आज हमारे दादा जी किसी काम के नही हैं एक कोने में पड़े खाँसते रहते है किन्तु समाज में मेरा बहुत मान है! यह शोध का विषय है कि मेरा मान मेरी परवरिश उपलब्ध समाज के कारण है जो दादा जी के संघर्ष का परिणाम है! इसलिए मैं आपकी इस दलील को नही मानूंगा कि दलित नेताओ ने समाज के विकास में कोई योगदान नही दिया है! यह बात हो सकती है कि दलित नेताओ ने अपेक्षित योग दान न किया हो किन्तु उन्होंने अपने मानवीय विकारो के रहते हुए समाज के लिए सर्वोतम योग दान दिया है!

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