दर्शन में अतिसंयुक्ति
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अपना गोत्र बताओ, पता किया जाये तुम भटके हुए मूल निवासी हो या विदेशी ?
Ashok Krishn I don't know my gotra.How can I know it?
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- Kamlesh Kumar Mittra so sad, CAA for you only
- Ashok Krishn Kamlesh Kumar Mittra,but I think I would be able to prove my citizenship.
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- Vipin Kumar Payasi Ashok Krishn very simple u should ask to your grandfather .
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- Ashok Krishn Vipin Kumar Payasi, it's not so easy.Leave aside grand father I don't have even parents.
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Atulendu Pankaj Ashok Krishn शांति कुंज, हरिद्वार जाकर अपना नया गोत्र प्राप्त करें। क्योंकि आपने अपना पुराना गोत्र खो दिया है । इसके लिए आपको शांति कुंज में 9 दिन रहना पड़ेगा, रहना और खाना नि: शुल्क है । या अपने आसपास के गायत्री शक्तिपीठों से भी अपना नया गोत्र प्राप्त कर सकते हैं। जिससे कि आप संस्कारित होकर कई शुभकार्य कर सकते हैं । जो अपना मूल गोत्र भूल चुके होते हैं, उनके लिए भारद्वाज गोत्र उत्तम माना जाता है । गोत्र का मतलब होता है गहराई में जाकर अपने मूल जड़ को जानना कि आप किस रिषि-महर्षि के संतान हैं। भारत के द्विजों(विद्वानों) को "भारद्वाज" गोत्र से जाना जाता है । बनियों के गोत्र "कश्यप" होते हैं ।
- Vipin Kumar Payasi Ashok Krishn if you are interested to know about gotra please contact your family member .
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- Atulendu Pankaj Kamlesh Kumar Mittra यहां पर और अच्छे -अच्छे संस्कारों का प्रशिक्षण भी नि: शुल्क दिया जाता है, साथ ही रहना और खाना भी फ्री । श्रद्धालु ही पाते हैं उल्लु भी तरसते हैं ।
- Kamlesh Kumar Mittra Atulendu Pankaj मित्र मधुशाला कहो शांतिकुंज को !
- Atulendu Pankaj हां मित्रों, मंदिर मस्जिद वैर कराये, मेल कराये मधुशाला । मित्रों हम जिस रंग का चश्मा पहनेंगे, संसार हमें उसी रंग का दिखलाई देगा ।जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ।
Many people Many Minds.
तुलसी इस संसार में भांति-भांति के लोग
कोई बांटते दवा तो कई फैलाते रोग । - Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj प्रभु की मूर्त है भी ? वेद ईश्वर को निराकार बताते हैं...
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram वेद, ईश्वर को निराकार बताते हैं, प्रभु की मूर्ति को नहीं ।
प्र + भु = प्रभु , प्र = प्रकट होना और भु = भू-लोक । भू-लोक में जितने भी माडल हैं, वह प्रभु के प्रतिरूप (मुर्त) ही है ।
जैसे- वराह के रूप में, वामन के रूप में, नर-सिंह के रूप में, मत्स्य,कच्छप इत्यादि असंख्य रूप में प्रभु के प्रतिरूप (मूर्त्त) हैं । मानो तो देव नहीं तो पत्थर, वरना गदहा नहीं तो खच्चर । - Indra Kumar Indra Kumar Atulendu Pankaj जी,
भूत प्रेत और देवी देवा,ईश ब्रम्ह ओंकार ।
ये सब वांणी जाल है,जीव जमा गहु सार ।। - Indra Kumar Indra Kumar क्योंकी--
एक जीव जो खतह पद,बुद्धि भ्रांति से काल ।
काल होय बहु काल रच,तासे भयो बेहाल ।। - Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj मानने से बात नहीं बनेगी, जानो। आप जानने की कोशिश नहीं करते। निराकार की मूर्ति कैसे बनेगी ? किसने देखा ? कितने ईश्वर हैं?
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram जब जब निराकार साकार हुए तब तब उनकी मुर्तियां बनी । ये तो सभी जानते हैं कि निराकार का कोई आकार नहीं होता लेकिन जब वो किसी रूप में भूमि पर प्रकट होता है तो उसका रूप साकार हो जाता है । इसी साकार रुप से मुर्तियां बनायी जाती है। जैसे कोरोना विष्णु/विषाणु इस जगत में निराकार है, इसका साकार रूप सुक्ष्मदर्शी के द्वारा देखा गया ।जिसके पास शक्तिशाली सुक्ष्मदर्शी था, उसने कोरोना विष्णु का साकार रूप सारे संसार को दिखाया, जो पहले निराकार था । इस तरह निराकार को साकार किया जाता है ।
जो दूध पहले गाय में निराकार था, जो घी पहले दूध में निराकार था, साकार
हुआ कि नहीं ?
उसी प्रकार ईश्वर जगत में निराकार है, चौरासी लाख जीव में साकार है कि नहीं ? - Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj कोरोना विषाणु निराकार नहीं। उसका एक आकार है चाहे छोटा ही सही जैसे अणु का भी आकार होता है। ईश्वर जीव और प्रकृति हैं । जो दिखता है वह सब प्रकृति है। ईश्वर सर्वव्यापक है इसलिए उसे अवतरित होने की आवश्यकता नहीं। बीज में वृक्ष है और उसका एक समय है प्रोसेस है। मैंने दूध में घी ना होनै का तो बोला नहीं, हाँ उसका भी प्रोसेस है। वह भौतिक वस्तु है । ईश्वर भौतिक नहीं । सब उसमें व्याप्य हैं। उसको अनुभव ही किया जा सकता है। वह इन्द्रियों से परे है तभी तो आरती गाते है,"तुम हो एक अगोचर....।
- Charan Singh Baudh Atulendu Pankaj बंधु, जैसे प्रभु का विच्छेद किया है उसी तरह ईश्वर का विच्छेद करें व उस पर चिंतन करें. शायद रास्ता समझ आये.
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram बेंत के वृक्ष में इन्द्र अमृत क्यों न सींचे, वह फल-फूल नहीं सकता । उसी प्रकार मूर्ख कोई बड़े से बड़े गुरु क्यों न मिल जाएं उसके हृदय में चेतना नहीं जगती ।
निराकार का मतलब यही है जिसका कोई आकार नहीं होता है ।शरीर के अंदर आत्मा का आकार निराकार है लेकिन अध्यात्मिक प्रयास/प्रोसेस के द्वारा इसे साकार किया जाता है । साकार रूप देखना है तो ध्रुव जैसे "ओम् नमो भगवते वासुदेवाय" शुरू कर दो या अपनी भौतिक प्रोसेस को मानिए । अगर दोनों में से आप किसी एक को नहीं मानते हैं तो आप अपने आप को ही निराकार मान लेना चाहिए क्योंकि गर्भ में आने से पहले आपका कोई आकार नहीं था । - Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram जल से पतला ज्ञान है और ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान है । वैज्ञानिकों ने साकार से निराकार होने का समाधान है ख़ोज लिया है। वह एक ऐसा प्रतिरोधी-प्रकाश-तरंग विकसित किया आपके देखने की दिशा को दूसरी तरफ़ कर देता है जिसके कारण वह साकार आपको निराकार दिखाई देगा । कुछ दिनों के बाद कोई निराकार जब आपके आंखों के सामने साकार प्रगट प्रकट हो तो उसे ईश्वर मान लेना या हो सकता है यमराज भी प्रकट न हो जाएं ।
- Atulendu Pankaj Charan Singh Baudh विच्छेद आप ही कीजिए मैं तो ईश्वर का मतलब भगवान समझता हूं ।भ ग व आ न
भ= भूमि, ग=गगन, व=वायु, आ=आग और न= नीर । मूल पंचतत्व ।
ईश्वर=ई+अश्व+र= ई+घोड़ा+र=ईश+घोड़ा+रस्सी=ब्रह्म+जीव+नियंत्रण ।
ब्रह्म जो जीव को नियंत्रण में रखे या जीव जो ब्रहम को नियंत्रण में रखे या जीव जो ब्रह्म के नियंत्रण में रहे या ब्रह्म जो जीव के नियंत्रण में रहे, ईश्वर ही कहलाते हैं। जैसे भक्त और भगवान, भगवान और भक्त । - Charan Singh Baudh Atulendu Pankaj लगे रहो शायद ईश्वर मिल ही जाय.
- Atulendu Pankaj मुझे है काम ईश्वर से,जगत रूठे तो रूठन दे ।
प्रभु सबमें समाया है, समाना हो तो ऐसा हो । ईश्वर, परमेश्वर, योगेश्वर, घुश्मेश्वर,भीमेश्वर, त्रयम्बकेश्वर, ज्ञानेश्वर, सर्वेश्वर, वटूकेश्वर। - Kamlesh Kumar Mittra Atulendu Pankaj छंद लिखने बाला अहंकारी है, अहंकारी को शांति की प्राप्ति नहीं होती, ईश्वर तो परम शांति और आनंद का नाम है(मुझे है काम ईश्वर से,जगत रूठे तो रूठन दे ।)
- Atulendu Pankaj Kamlesh Kumar Mittra मुझे है काम ईश्वर से जगत रूठे तो रूठन दे ।
किसी भी तथ्य के सकारात्मक और नकारात्मक दो नजरिए होते हैं । आप अपनी सोच सकारात्मक न रखें तो हमें क्या नुकसान है । जब किसी के साथ या आसपास ईश्वर हों तो वहां नकारात्मक भी सकारात्मक हो जाता है ।जगत रूठे तो रूठन दे, रूठने दो जगत को । जगत को मनाने से क्या मिलेगा -- "बैमौत" ।
इसलिए परेशान न हों, प्रसन्न रहें । - Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj वैज्ञानिकों के बस से बाहर है। और जिस दिन ऐसा हो भी गया फिर ईश्वर की क्या जरुरत है किसी को फिर तो वैज्ञानिक ही सर्वशक्तिमान हो जाएगा। खैर आपसे ज्यादा बहस नहीं। आप जैसे जानो/मानो this is up to you. ओ३म् नमस्ते जी
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram ऐसा पहले भी था और आज भी है, बहुत जल्द ही आपके पास आनेवाला भी है।सद्ज्ञानी(गुरु-वैज्ञानिक) ही सर्वशक्तिमान है, क्योंकि आपके निराकार को कोई सर्वशक्तिमान नहीं मानते । This is too up to you.शांति शांति.. ओम् शांति...
- Kamlesh Kumar Mittra Atulendu Pankaj बात बहुत हैं शांति लेश मात्र भी नहीं होती हिन्दू धर्म और
उसके हिन्दू सम्प्रदायों में ! - Kamlesh Kumar Mittra Atulendu Pankaj वैज्ञानिक जीवन जीने की उत्कृष्ट कला है जैन धर्म में और अध्यात्मिन जीवन की बौद्ध धर्म में, पाप से मुक्त होना है तो अबिलम्ब हिंदुत्व का परित्याग कर दो !
- Ashok Krishn Kamlesh Kumar Mittra, hindutva to aajkal dharm ke arth mai liya ja raha hai.Ham dharm ko kaise chhor sakte hai.
- Kamlesh Kumar Mittra Ashok Krishn ज्ञान से
- Atulendu Pankaj Kamlesh Kumar Mittra हिन्दू = हि + न + दू = हिमालय + नदी + दूर तक = गंगा । मन चंगा तो हर हर गंगा । हिन्दू सम्प्रदाय = गंगा संप्रदाय = शांत और शीतल सम्प्रदाय = पवित्र और बलशाली सम्प्रदाय ।
- Ashok Krishn Kamlesh Kumar Mittra,Gyan se dharm ki samajha aati hai,chhut ta nahin hai.
- Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj जी नहीं, वैज्ञानिक आपको किताब छाप कर देगा, ज्ञान नहीं। अच्छे बिस्तर देगा, नींद नहीं। कास्मेटिक देगा, सुंदरता नहीं। अच्छे व्यंजन देगा, भूख नहीं। और आपके ये समझ भी नहीं आयेगा। बस इतना ही काफी है।
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram आप भी तो निराकार का साकार रूप कागज पर छापो । वैज्ञानिक आपको शराब दे सकता है, नशा नहीं, पीकर तो देखें ।
वैज्ञानिक आपको ज़हर दे सकता है, मृत्यु नहीं, चख कर तो देखें सुबह सुबह । - Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj ले लो कोरोना वैज्ञानिक से और प्रसन्न रहें😁😁
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram ठीक है, अगर मुझे है मिल गया तो आपको अवश्य भेजेंगे ताकि आप भी इससे लाभान्वित होंगे ।🌞🌞🌞🌞🌞
- Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj आप ही वैज्ञानिक वैज्ञानिक का ढोल पीट रहे हो... उनकी विनाशलीला का आपको भान नहीं है क्या?
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram आप थाली ही पीट लीजिए । मैं तो अपनी रामलीला में लीन हूं और कोई लीला का भान आप ही करें, जिससे आपको साकार रूप का भान हो ।
- Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj धन्यवाद। आप अपने में मस्त और हम निराकार में मस्त।
हाँ, एक दिन आयेगा जब आप मानेंगे... ईश्वर निराकार है। - Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram हां । स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती, दयानंद आदि निराकार हो गए हैं, जब वो साकार होंगे तो आप भी मान लेना।
- Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj लगे रहो। ऐसे तो आपके बहुत से साकार निराकार हो चुके हैं।
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram बिल्कुल सही । सुबह सूर्य साकार तो रात में निराकार । यही है जगत का व्यवहार ।
- Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj सूर्य जड़ पदार्थ है और रात को धरती के दूसरी तरफ है वो तो निराकार नहीं है..
- Atulendu Pankaj Arya Prajapati Parsa Ram सूर्य एक साकार देवता हैं । जो सारे सृष्टि को प्रकाशित करते हैं , पोषित करते हैं ।
रविवार का नाम सूर्य को ध्यान में ही रखकर रखा गया है । सूर्य को जड़ पदार्थ समझने वाले स्वयं जड़ होते हैं , जो मिट्टी की गहराई में जाकर जड़े होते हैं, उसे उस तरफ अंधेरा ही दिखाई देता है, जीवन पर्यन्त उसी घनघोर अंधेरे में ही रहता है, जीवन में उसे सूर्य के दर्शन नहीं होते हैं इसलिए उस जड़ बुद्धि वाले जीव को सूर्य एक जड़ पदार्थ सा लगता है ।
सठ/जड़ सुधरहिं सतसंगति पाके ।
आंखें बंद, स्वप्न निराकार
खुली आंख, स्वप्न साकार । - Arya Prajapati Parsa Ram Atulendu Pankaj खैर आप नहीं समझ सकते।
- Kamlesh Kumar Mittra Atulendu Pankaj दर्शन में अतिसंयुक्ति कर देने से मूल लाभ खो जाता है! इस कारण वह पाखंड जैसा दिखने लगता है! दर्शन थोपा नही जाता है जब स्रोता का स्तर ऊपर उठ जायेगा वह ग्रहण कर लेगा! दार्शनिक को पपित्र नदी और झील की तरह रहना चाहिए पथिक की प्यास ही उसे नदी और झील तक खींच कर लाती है, जब नदी चल कर आती है तो भारी तबाही लाती है, विद्वता का घमंड छोड़ दें और किसी को अज्ञानी न कहें ! ज्ञान तो उसके अन्तर चित्त में है बीज के रूप में जिसको फलित होना बांकी है जब उपयुक्त समय आएगा पक जायेगा !
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