चमार और भंगी जन्म-जात बौध उपासक

किताबो के आगे की बातें -

यदि वह बोध गया में बैठकर यह देखने में सक्षम थे कि उद्द्क रामपुत्र और अनार कलाम गुजर गायें हैं तो उन्होंने यह भी देख ही लिया होगा कि २.५ हजार वर्ष बाद कमलेश मित्रा नाम का व्यक्ति इस विषय को प्रश्न बनायेगा कि उन्होंने शुद्रो को पहले शिक्षा क्यों नही दी? जिन्हें आप बंजारा कह रहे हैं वे आनाज के व्यापारी थे, जिन्हें उन्होंने अपने शीश के दो बाल दिये थे इसलिए वे सब धन से संपन्न हो गए! अब तो मेरा दुःख और भी सघन हो गया है कि भगवान बुद्ध ने ब्राह्मणों को धम्मचक्र दिया और बनियों को धन दिया क्षत्रियो को शौर्य दिया किन्तु शूद्रो को मरा हुआ खाने का उपदेश दिया है! शायद आप भली-भांति जानते हों चमार और भंगी जन्म-जात बौध उपासक हैं परन्तु समाज में फिर भी उनकी दुर्दश का मुख्य कारण भगवान द्वारा उनको प्राथमिकता न दिया जाना है!

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