भक्ति-भजन है या कायरता ?
भक्ति-भजन है या कायरता ?
भक्तिमार्ग/भक्ति-भजन का उदय कायरता की परकाष्ठ थी जो मुस्लिम काल में उत्पन्न हुई थी इसमें मुस्लिमो को लगने लगा था भक्तिमार्ग/भक्ति-भजन से लगे लोगो से उनके राज्य को कोई खतरा नहीं है इसलिए उन्होंने इसको प्रोत्साहित किया उसके परिणाम सरूप मुस्लिमो में भी भक्तो की एक शाखा उत्पन्न हो गयी जिसे फ़कीर/(.........) कहते हैं! भक्ति-भजन ऋग्वेद की रिचाओ से ही मिलती जुलती प्राथनाएं है उस समय भी वैदिक संस्कृति के लोगो को अनार्यो का भय सताता था तो वे अपना अधिकतम समय भक्ति-भजन में गुजार कर अपने को मानसिक रूप से शांत करते थे! मोदी के शासन काल में हिन्दुओ ने जो आतंक मचा रखा है इसकी प्रतिक्रिया सन २०२५ में दिखने लगेगी तब भी आपको सभी मनुवादी भक्ति-भजन में ही नजर आयेंगे!
भक्त को मार्ग की जरूरत नही होती, ध्यानी को मार्ग की जरूरत होती है कि किस विधि पाए ! साहित्यकारों को भक्ति-मार्ग नही, भक्ति-भजन कहना चाहिए!
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