जय भोलेनाथ
जय भोलेनाथ
भाई बहुजन के साथ चलने में ही भलाई है! वर्ना वे लोग हम-आपको पागल घोषित कर देंगे और किनारा कर लेंगे इसलिए जोर से बोलो जय भोलेनाथ! ब्राह्मणी कहानियो के अनुसार भोलेनाथ अनार्यो के आराध्य देव हैं जिन्होंने विष्णु को कई बार घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया ! कुछ तो समझो भाई ! ब्राह्मण(मनुवादी) जिसे मिटा नही पाता है उसे अपना घोषित कर देता है! भगवान बुद्ध को विष्णु का दसवां अवतार बताकर उनकी विरासत पर कब्ज़ा कर लिया! ग्वाले कृष्ण को विष्णु का अवतार बताकर पूरे बहुजन समाज को मूर्ख बनाये हुए है! संत रैदास को पूर्व जन्म में ब्राह्मण बताकर काशी क्षेत्र के चमार समज से मिटा दिया! पटेल पर कब्ज़ा करके कांग्रेस को मिटाने बाला है! संविधान के सामने सिर झुकाकर अम्बेडकरवाद को समाप्त कर दिया है! आज आंबेडकरवाद की जो शाखा है वह कट्टर आंबेडकर बाद है जोकि कट्टर हिन्दूवाद का ही प्रतिविम्ब है! कट्टर हिंदूओ की तरह ही वह मंदबुद्धि का विवेक हीन है! कल को मनुवादी आंबेडकर पर भी षड्यंत्र पूर्वक कब्ज़ा कर लें, (जोकि ७५% हो चूका है क्योकि देश में दलितों का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक शोषण संविधान की सीमाओ में रह कर किया जा रहा है ऐसा लगता है, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों से परिलक्षित होता है) तब क्या
आंबेडकरवादी आंबेडकर को भी छोड़ कर भाग जायेंगे! अब कुछ मतलब की बात हो जाये अपना इतिहास खंगाल कर देखलो मूलनिवासी जो अनार्य/द्रविड़ के नाम से भी जाने जाते हैं वे सभी प्रकृति की पूजा करते थे लिंग पूजा मूलनिवासियों की संस्कृति का अंग है न की मनुवादी संस्कृति का! इतिहास को जानने के लिए दोस्तो और दुश्मनों दोनों की इतिहासिक पुस्तकें पढ़कर ही सही निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है! जिस प्रकार शरीर के सभी अंगो को स्वीकार किया जाता है किसी की उपेक्षा नहीं की जाती उसी प्रकार प्राकृतिक ज्ञान और संविधानिक ज्ञान दोनों को आत्मसात करना पड़ेगा! भोलेनाथ को कहीं से आना नही पड़ता वह हर स्त्री-पुरुष के शरीर में समाहित हैं! अब बताओ भोलेनाथ आ ही जाएँ तो कैसे पहचानोगे ?
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