"अम्बेडकरवाद" और "कट्टर आंबेडकरवाद" में अंतर
"अम्बेडकरवाद" और "कट्टर आंबेडकरवाद" में अंतर
मित्र आप का प्रश्न सरल नही है, बहुत सूक्ष्म अंतर है "अम्बेडकरवाद" और "कट्टर अम्बेडकरवाद" में! "कट्टर आंबेडकरवाद" अँधा साड़ हैं! कट्टर हिन्दूवाद से भारतीय सभ्यता संस्कृति में प्रेम और भाई-चारे की हानि हुई है उसी प्रकार "कट्टर आंबेडकरवाद" आत्म-घाती है! कट्टर अम्बेडकरवादी बहुजनो को कभी सुसंगठित नही होने देंगे, इस कारण "आंबेडकरवाद" कभी सफल न हो पायेगा पाखंडवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं इसमें अम्बेडकरवादीयों को उलझना ही नहीं चाहिए यह उनका विषय नही है! अम्बेडकरवादियों को केवल राजनीतिक काम करना चाहिये! पाखंड-वाद को ख़त्म करने का काम बाबा साहब ने बौध भिक्षुओ को दिया है! समाज में ऐसे भिक्षु होने चाहिए जो केवल धम्म का प्रचार-प्रसार करें! हिंदूं पाखंड के विरोध का नही क्योकि जब धम्म का प्रकास फैलेगा तो पाखंड का अंधकार अपने आप समाप्त हो जायेगा किन्तु हमारे समाज में अभी ऐसे भिक्षु नहीं हैं जो केवल धम्म की चर्चा कर सकें! भिक्षु केवल हिंदूओ की निंदा करते हैं जिस कारण उनका अष्ठ-शील खंडित होता है और उनकी वाणी प्रभाव हीन हो जाती है! आंबेडकरवादियों को चाहिए कि वे सभी बहुजन-बैलों को योग्य भिक्षुओ की धम्म देशना का श्रवण करने के लिये एकत्र करें! आंबेडकरवादी बहुजनो के साथ पाखंड निंदा में न उलझे! आंबेडकरवादियों का पाखंड विरोध उनको "कट्टर अम्बेडकरवादी" बनाता है, इस कारण बहुजन एकत्र नही हो पाते हैं! पाखंड की समाप्ति अम्बेडकरवादियों का विषय ही नही है, आंबेडकरवादियों का बिषय राजनीतिक सत्ता को शुद्रहड़ करना है, यह विषय बौध भिक्षुओ का है इसलिए संगठन बनाकर काम करना होगा आंबेडकरवादी केवल बहुजनो को जोड़ने और एकत्र करने का काम करें अनावश्यक विषयों में न उलझें ! बहुजनो को एकत्र करके धम्म-देशना के श्रवण के लिये उपयुक्त भिक्षुओ के पास लाते रहें, पाखंड का अँधेरा जरुर मिटेगा! सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो !
Comments
Post a Comment