जाति धर्म और वर्ण

जाति धर्म और वर्ण 

मित्र सिमित शब्दों में इतना ही कहा जा सकता था वह मैंने कह दिया! (१) पिछले ७० सालो से दलितों को हिन्दू कहा जाता था, क्या किसी ने विरोध किया है? सिक्ख, बौध, और जैन, हिन्दू विधि से नयायालय में पारवारिक और सम्पति के विवाद लाते रहें हैं क्या कभी किसी ने विरोध किया है? किसी का धर्म क्या होगा यह राजनीति निर्धारित करती है! कोई भी व्यक्ति धर्म से मुक्त नही हो सकता है, राजनीतिक उन्माद के कारण! (२) आरक्षण जीवित है तो जाति बतानी ही होगी और जाति, कुल से ही निर्धारित होती है कि वह व्यक्ति किस कुल से आता है! (३) अब रह गयी बात वर्ण की तो यह ज्योतिष से निर्धारित होती है! आज ज्योतिष कोई गुप्त ज्ञान नही है! २०-२५ घंटे में पूरी ज्योतिष सीख सकते हो यूं-ट्यूब के माध्यम से! इसमें मात्र जन्म का स्थान और जन्म का समय प्रयोग किया जाता है! जातक के जन्म के साथ ही उसका वर्ण निर्धारित होता है! दुष्ट पुरोहित शूद्र जातियों में जन्मे बच्चे के माँ-बाप को बच्चे का सही वर्ण नही बताते थे इस कारण बच्चा बड़ा होकर बगावत कर जाता था/है ! आज की भाषा में कहूँ तो वर्ण का मतलब मेधा से है! शुद्र कुल में जन्मा बच्चा भी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य मेधा बाला हो सकता है! यह बात ज्योतिष विज्ञान बिना किसी जातिगत भेदभाव के कहती है ! भेद-भाव पुरोहित और पण्डे करते थे इसलिए आवश्यक हो गया है कि दलित/शूद्र खुद ज्योतिष को जानें तथा पुरोहित और पण्डों को लात मार दें!

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