बाबा साहब भगवान हैं अथवा नही हैं ?




बाबा साहब भगवान हैं अथवा नही हैं ?


Vipin Kumar Payasi आपके दो प्रश्न हैं मित्र, १. इन्सान मरता है २. भगवान नही मरता है! इसी सिद्धांत को आगे बढ़ाएं तो न राम जीवित हैं न कृष्ण, ओके ! दर्शन शास्त्र के अनुसार शरीर मरता है आत्मा अमर है! यह अमर आत्मा देव की भी अमर है और दानव की भी अमर है! कोई व्यक्ति अपने कर्मो के आधार पर देव और दानव बनता है ओके ! हिन्दू दर्शन के अनुसार राम की आत्मा भी अमर है और कृष्ण की भी, हो सकता है दोनों की एक हो ! अपने अच्छे कर्मो के कारण वे देव कुल(अथवा लोक) में होंगे! कोई भी हिन्दू दार्शनिक यह दावा नही कर सका है कि बाबा साहब नरक लोक में हैं या मुक्त हो गए हैं! हिन्दू दर्शन के अनुसार आत्मा ब्रह्म में विलीन हो जाती है वो भी केवल पुन्य आत्मा ! हिन्दू धर्म में कतिपय देवी-देवता है जो सामान्य बोल चाल में अपने कल्याणकारी कार्यो के कारण भगवान कहे जाते हैं ! बाबा साहब ने भारत को उस समय संविधान दिया जब किसी अन्य पर कोई सहमति नही बन पाई थी ! इसे विधि का विधान ही क्यों न कहा जाये कि एक शुद्र को संविधान लिखने का मौका मिला और उसने हजारो वर्षो से उत्पीडित लोगो के कल्याण का प्राविधान कर दिया क्या यह ब्रह्म कार्य नही है जो ब्रह्म कार्य करता है उसे ही भगवन कहा जाता है! यदि कोई अपने आग्रह अथवा दुराग्रह का परित्याग कर दे तो उसे बाबा साहब में भगवान ही नजर आएगा अन्यथा तो लोगो भगवान के अस्तित्व पर भी प्रश्न-चिन्ह लगा देते हैं और उसका न होना भी सिद्ध कर देते हैं! उम्मीद करता हूँ आपके दोनों प्रश्न शांत हो गए होंगे ! आत्मा ब्रह्म का ही रूप है आत्मा शरीर धारण करती है फिर शरीर को त्याग कर ब्रह्म में विलीन होती है इसलिए यह कहा गया है हर प्राणी ब्रह्म है या ब्रह्म का सरूप है जब ऐसा है तो बाबा साहब भगवान क्यों नही हैं! दर्शन पर चर्चा करनी है तो फिर राजनीति बाते छोडो और अगर राजनीति की ही बाते करनी हैं तो इस विषय को छोडो की बाबा साहब भगवान है अथवा नही हैं !

क्या बाबा साहब भगवान हैं ?

Vipin Kumar Payasi थोडा विचार करें, राम को न उनके जीवन काल में भगवान स्वीकार किया गया और न आज किया जा रहा है! तुलसी की रामचरित मानस की कथा को एक किनारे रख दें! कृष्ण को भी उनके जीवन काल में भगवान स्वीकार नही किया गया और न आज किया जा रहा है! मीरा और सूरदास के पदों को एक किनारे रख दें! तो बहुत छोटा सा समुदाय है जिसके लाभ के लिए राम और कृष्ण ने काम किया है वे ही उनको भगवान मानते है या उनके कारण जिनकी भौतिक और अध्यात्मिक दुकाने चल रही हैं वे ही उनके भगवान होने का प्रचार-प्रसार कर रहें हैं ! कोई भी वैज्ञानिक सोच का मूढ़ उनको भगवान मानने को तैयार नही है ऐसे ही मूढ़ लोग बाबा साहब को भी भगवान नही मानते है तो इससे उनके द्वारा किये गए कल्याणकरी कार्यो को कम करके नहीं आँका जा सकता है! यदि राम और कृष्ण भगवान हैं तो इस बात में कोई संदेह नही है कि बाबा साहब ने शूद्रो की ८५ प्रतिशत आबादी को उनके नरकीय जीवन से बाहर निकाला है ! इस बात को माननीय नरेंद्र मोदी और माननीय अरविंद केजरीवाल ने भी स्वीकार किया है कि अगर बाबा साहब ने ऐसा उदारवादी संविधान न दिया होता तो वे कभी भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री नहीं हो सकते थे! अगर राम और कृष्ण की व्यवस्था के अनुसार ही संविधान बनाया गया होता, तो इस बात में कोई संदेह नही होना चाहिए कि बाबा साहब, राम और कृष्ण के सामान ही बहुसंख्यक समाज के लिए भगवान हैं ! बल्कि मैं तो कहूँगा कि वे राम और कृष्ण से भी एक कदम आगे हैं! अगर समाज में आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक समानता ला दी जाती है तो आरक्षण का उपबंध समाप्त किया जा सकता है इसीलिए आरक्षण १०-१० वर्षो के लिए बढ़ता रहता है! इसलिए भारत का संविधान सर्व समज के हितो को सुरक्षित रखने में सक्षम है ! बाबा साहब को जाती विशेष या वर्ग विशेष का भगवान कहना अविकसित संस्कारो का प्रतिफल है! RSS की किताबो के बहार की कितवे भी पढ़े!

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