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Showing posts from May, 2020

आज का दलित क्या कर रहा है ?

आज का दलित क्या कर रहा है ? दोस्तो ये लेख पढ़ के आप को बहुत ही गुस्सा आएगा ,क्योंकि ये सत्य है और सत्य कड़वा होता है। लेकिन सत्य से भागना नहीं है पूरे लेख को बहु त ही ध्यान से पढ़िए, क्योंकि इस लेख को किसी एक इंसान ने नही बल्कि आज के समय के सोशल मीडिया एक्सपर्ट अम्बेडकर टीम द्वारा बहुत ही अनुभव और गहराई से हमारे समाज के हालात और हालत को इस लेख में ब्यान किया है। तो आइए जानते हैं कि आज हमारा दलित समाज किस ओर जा रहा है और क्या कर रहा है.... 1- आज का दलित मंदिरों में जाकर घंटा बजा रहा है और प्रसाद के लिए लाइन खड़ा है। 2- आज के दलित लड़के WHATSAPP, FACEBOOK पर SELFIE GROUP और शायरी GROUP मे घुसे बैठे हैं। 3- आज का दलित चौपाल में बैठ कर मनुस्मृति चाट रहा है और उसी चौपाल में ऊंचे स्थान पर बैठे किसी हरामी मनुवादी के गुणगान गा रहा है। 4- आज की दलित औरतें वर्त रखने में और पूजा पाठ में व्यस्त हैं। 5- आज का दलित अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजेगा लेकिन मंदिर जरूर भेजेगा है। 6- आज का दलित भीम सभा का गठन नहीं करेगा लेकिन ऑर्केस्ट्रा का प्रोग्राम जरूर करेगा। 7- आज का दलित युवा बाबा साहब की पोस्ट SHARE या...

गोत्र का गड़बड़ झाला

https://detechter.com/why-same-gotra-marriage-is-forbidden-science-behind-hindu-gotra-system/?fbclid=IwAR38tfQl-Bks5uFZRNhzWQLfPl6Ievs5adxJCvRNikmZba7KiARyPn-c16M

महा पाखंड की फैक्ट्री -

महा पाखंड की फैक्ट्री - एक अन्य मित्र की पोस्ट आप से शेयर करनी जरुरी है आप लोग ऐसे धंधे बाजो से बचे यह गोत्र के नाम पर पाखंड की वेड़ियाँ हैं! शांति कुञ्ज महा पाखंड की फैक्ट्री है -{ Atulendu Pankaj Ashok Krishn शांति कुंज, हरिद्वार जाकर अपना नया गोत्र प्राप्त करें। क्योंकि आपने अपना पुराना गोत्र खो दिया है । इसके लिए आपको शांति कुंज में 9 दिन रहना पड़ेगा, रहना और खाना नि: शुल्क है । या अपने आसपास के गायत्री शक्तिपीठों से भी अपना नया गोत्र प्राप्त कर सकते हैं। जिससे कि आप संस्कारित होकर कई शुभकार्य कर सकते हैं । जो अपना मूल गोत्र भूल चुके होते हैं, उनके लिए भारद्वाज गोत्र उत्तम माना जाता है । गोत्र का मतलब होता है गहराई में जाकर अपने मूल जड़ को जानना कि आप किस रिषि-महर्षि के संतान हैं। भारत के द्विजों(विद्वानों) को "भारद्वाज" गोत्र से जाना जाता है । बनियों के गोत्र "कश्यप" होते हैं । }

बीजेपी आईटी सेल

https://www.facebook.com/Gouravvallabhunofficial/videos/671773776917247/UzpfSTEwMDAxMjA4OTU5ODA3Mjo4NzEzMTEwNDk5NDg1NDA/?fref=jewel&__tn__=%2Cd-]-]-Z-R&eid=ARAquiZCu0hQtbUd5nQoIsfAXKE2vOhIuztinOJuusGYOOI8KmKDp1T9yrvC2ub-DF_vBc0zO7vcU4Su&hc_location=friend_browser

तलवार की भाषा में भी समझाया जा सकता है !

तलवार की भाषा में भी समझाया जा सकता है ! बौद्धों ने दो हजार बर्षो तक धैर्य से काम लिया किन्तु आरएसएस ने जब बदले की परम्परा आरंभ कर दी है तो खून-खराबा भी होगा क्योंकि सम्राट अशोक ने जब धम्म विजय आरम्भ की थी तो कहा था हम विश्व शांति के लिए तलवार का त्याग करते हैं किन्तु कोई तलवार की भाषा ही समझता है तो मौर्य बंश का यह दायित्व बन जाता है कि उसे तलवार की भाषा में भी समझाए !

कच्चे शमशान और कब्रिस्तान का विवाद

कच्चे शमशान और कब्रिस्तान का विवाद संक्षेप में कहूँ तो वह स्थान हजारो वर्ष तक कच्चा शमशान था इसलिए वहां मस्जिद बनाई गयी, उससे पहले वह भिक्षुओ का विहार था जहाँ हजारो भिक्षुओ का कत्लेआम किया गया था! नागापंथ और अघोरी ध्यान की जिस पद्दति का प्रयोग करते है वह बुद्ध की ध्यान पद्दति कयानुपशाना की पद्दति दसम मंस्विकर पब्बम के अंतर्गत आता है! जिसमें ध्यानी सड़ रही लाशो को देखकर काया की आसक्ति से मुक्त होने का प्रयास करता है! विवाद इस कारण उत्तपन हुआ क्योकि मुस्लिम लाशो को दफनाने पर जोर दे रहे थे! नागा और अघोरी लाशो को खुला रखना चाहते थे! मूलतः यह कच्चे शमशान और कब्रिस्तान का विवाद है जिसे षड्यंत्रकारियों ने राममंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद बना दिया है !

पाली भाषा का इतिहास और सीमायें

पाली भाषा का इतिहास और सीमायें मेरे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि रामायण का कोई पाली संस्करण है जबकि दक्षिण भारत में कन्नड़ में रामायण का संस्करण है, वे लोग अपनी भाषा को छः हजार साल पुराना मानते हैं और उन्हें अपनी भाषा पर गर्व है ! पाली भाषा नही है बल्कि बुद्ध काल में जो क्षेत्रीय भाषाएँ चल रही थी उनको आपसे में जोड़ने के लिए जो ग्रामर बनायी गयी थी उसे पाली कहा गया! जब बुद्ध साहित्य का संकलन तिपिटक रूप में किया गया तब पाली नामक भाषा अस्तित्व में आयी जिसका श्रेय भगवान बुद्ध के अरहंत शिष्य कच्चायण को जाता है! भगवान बुद्ध की कोई भी वाणी पाली में नही है! उनके अधिकतम प्रवचन श्रावस्ती में दिये गए इसलिए उसकी भाषा को कौशली कहा जाता था, जब वह मगध में प्रवचन देते तो मागधी बोलते और जब वैशाली में बोलते तब वहां की स्थानीय भाषा में! "पाली" भाषा के रूप में प्रथम संगीति में आयी जिसके अध्यक्ष महाकश्यप जी थे! बुद्ध काल में वाल्मीकि रामायण चर्चा का विषय नहीं थी इसलिए उसको पाली में अनुवाद किये जाने का कोई मतलब भी नहीं था! सम्राट अशोक के धम्म प्रचार के साथ ही तिपिटक सम्बं...

राम मंदिर केस

लिंक ऑफ़ राम मंदिर केस  https://www.youtube.com/watch?v=VEmRaiFhj6k&feature=share&fbclid=IwAR3M67XIbjiRTGxJdI41A0TJyhcuMitn_eEcW8dGullBQMBnN6FHmPimVF4

आईएएस इंटरव्यू

आज हम आपको आईएएस इंटरव्यू में पूछे गए कुछ IAS Tricky Questions के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जो कि यह सवाल कभी ना कभी किसी उम्मीदवार से पूछा गया है, अगर आपका भी सपना IAS Officer बनने का है तो आपकी General Knowledge अच्छी होनी चाहिए, जिससे आप आईएएस इंटरव्यू में पूछे गए सभी सवालों का तुरंत जवाब दे पाए। Question 1. आधा कटा हुआ एक सेब कैसा दिखाई देता है? Answer. इस सवाल का सही उत्तर है आधा कटा हुआ सेब आधे सेब की तरह दिखाई देता है। Question 2. जेम्स बांड को प्लेन से धक्का दे दिया गया, फिर भी वह जिंदा बच गया, बताओ कैसे? Answer. इसका सही जवाब है “उस समय प्लेन रनवे पर ही था” Question 3. ऐसी कौन सी चीज है जो पानी में गीली नहीं होती? Answer. इस सवाल को सुनने के बाद आप सोच रहे होंगे, भला ऐसा क्या हो सकता है जो पानी में गीली ही ना हो? लेकिन एक चीज है जो पानी में भी गीली नहीं होती, इसका जवाब है “परछाई” Question 4. विश्व का कौन सा देश है जो आज तक किसी का गुलाम नहीं हुआ है? Answer. इसका सही जवाब है “नेपाल” Question 5. “एक लड़का एक लड़की के साथ ऐसा क्या करता है कि लड़की रो पड़ती है?” Answer.यह सव...

क्या आर्य और अनार्य एक ही हैं?

क्या आर्य और अनार्य एक ही हैं? Kumar यदि आर्य और अनार्य केवल दो ही जातियां थी तो साढ़े छः हजार जातियां कैसे हो गयी ? एक-एक मोती को पिरोना होगा मित्र, ब्राह्मण(पुरोहित) ने बहुत उलझाया है अपनी बिटिया दे-देकर उन्होंने अपनी हर एक बिटिया से नयी जाति बनाई! एक ओर अनार्य ब्राह्मण की बिटिया पाकर खुश होते रहे! दूसरी ओर आर्य श्रष्टि (हिन्दू वर्ण और जाति व्यवस्था) का निर्माण करता रहा जाति, कुल, वंश , गोत्र सगोत्र, उपगोत्र अगोत्र, जारज, दत्तक, सहोदर, सौतेला, संकर आदि यह सब तो रक्त संबंधो पर आधारित जातियां हैं फिर कर्म पर आधारित जातियां है, कुछ अन्य क्षेत्र तथा देशो के नाम पर आधारित जातियां हैं इसका बहीखाता मंदिरों में पुरोहित रखता था इसलिए पुरोहित ब्राह्मण से भी श्रेष्ठ हो गया और बहुत कुछ अभी बांकी है! सुनते रहो और आनंद लेते रहो क्योंकि इतिहास में कुछ उलट-पलट नहीं किया जा सकता जो करने का प्रयास करोगे वह आरएसएस की तरह भक्तो की एक फ़ौज तैयार कर देगा वह बदला लेने को उद्दत हो जाएगी तथा वर्तमान के लिए दुखद और कष्टकरी ही होगी ! माला बनानी है तो प्रेम से एक-एक मोती को पकड़ कर पिरोना होगा ! पुरोहितो ने मोत...

मेघवाल

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मेघ,   मेघवाल, या   मेघवार , (उर्दू: میگھواڑ , सिंधी: ميگھواڙ ) लोग मुख्य रूप से उत्तर पश्चिम  भारत  में रहते हैं और कुछ आबादी  पाकिस्तान  में है। सन् 2008 में, उनकी कुल जनसंख्या अनुमानतः 2,807,000 थी, जिनमें से 2760000 भारत में रहते थे। इनमें से वे 659000  मारवाड़ी , 663000  हिंदी , 230000  डोगरी , 175000  पंजाबी  और विभिन्न अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ बोलते हैं। एक  अनुसूचित जाति  के रूप में इनका पारंपरिक व्यवसाय बुनाई रहा है। अधिकांश  हिंदू  धर्म से हैं, ऋषि मेघ,  कबीर , रामदेवजी और बंकर माताजी उनके प्रमुख आराध्य हैं। मेघवंश को राजऋषि वृत्र या मेघ ऋषि से उत्पन्न जाना जाता है।सिंधु सभ्यता के अवशेष (मेघ ऋषि की मुर्ति मिली) भी मेघो से मिलते है। हडप्पा,मोहन-जोद़ङो,कालीबंगा (हनुमानगढ),राखीगङी,रोपङ,शक्खर(सिंध),नौसारो(बलुचिस्तान),मेघढ़(मेहरगढ़ बलुचिस्तान)आदि मेघवंशजो के प्राचीन नगर हुआ करते थे। 3300ई.पू.से 1700ई.पू.तक सिंध घाटी मे मेघो की ही आधिक्य था। 1700-1500ई.पू.मे आर्यो के आगमन से मेघ, अखंड भारत के अलग अलग भागो म...