क्या आर्य और अनार्य एक ही हैं?
Kumar यदि आर्य और अनार्य केवल दो ही जातियां थी तो साढ़े छः हजार जातियां कैसे हो गयी ? एक-एक मोती को पिरोना होगा मित्र, ब्राह्मण(पुरोहित) ने बहुत उलझाया है अपनी बिटिया दे-देकर उन्होंने अपनी हर एक बिटिया से नयी जाति बनाई! एक ओर अनार्य ब्राह्मण की बिटिया पाकर खुश होते रहे! दूसरी ओर आर्य श्रष्टि (हिन्दू वर्ण और जाति व्यवस्था) का निर्माण करता रहा जाति, कुल, वंश , गोत्र सगोत्र, उपगोत्र अगोत्र, जारज, दत्तक, सहोदर, सौतेला, संकर आदि यह सब तो रक्त संबंधो पर आधारित जातियां हैं फिर कर्म पर आधारित जातियां है, कुछ अन्य क्षेत्र तथा देशो के नाम पर आधारित जातियां हैं इसका बहीखाता मंदिरों में पुरोहित रखता था इसलिए पुरोहित ब्राह्मण से भी श्रेष्ठ हो गया और बहुत कुछ अभी बांकी है! सुनते रहो और आनंद लेते रहो क्योंकि इतिहास में कुछ उलट-पलट नहीं किया जा सकता जो करने का प्रयास करोगे वह आरएसएस की तरह भक्तो की एक फ़ौज तैयार कर देगा वह बदला लेने को उद्दत हो जाएगी तथा वर्तमान के लिए दुखद और कष्टकरी ही होगी ! माला बनानी है तो प्रेम से एक-एक मोती को पकड़ कर पिरोना होगा ! पुरोहितो ने मोती बिखरा दिए हैं और माला का सूत उलझा दिया है थोडा मेहनत करनी होगी परन्तु हो जायेगा ! मेरी धागा सुलझाने की पुरानी आदत है और मोती पिरोने की भी ! आप भी आन्नद लो तथा भारत निर्माण में अपना योगदान करो क्योकि मैं मोहन भागवत का हिंदुस्तान नहीं बनने दूंगा! पुरोहितो ने मोतियों को बिखराने और सूत को उलझाने का काम इसलिए किया ताकि उनको विद्वान समझा जाये और उनके व्यावसाय की श्रेष्ठता बनी रहे, मनुष्य के जन्म संस्कार से लेकर मृत्यु संस्कार तक !
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