जातियों को जानो और मानो
जातियों को जानो और मानो -
" बहुजन ही भारत का मूल निवासी है " यह बात केवल आप जानते हैं! बांकी लोग तो अपनी जाति जानते हैं और अपनी ही जाति से नफरत करना जानते हैं इसलिए उनके पास कोई आधार नहीं है जिसके आधार पर वो खुद को मूल निवासी कहें! वे इतना और जान गये हैं कि वे हिन्दू हैं और मुस्लिम उनके दुश्मन हैं क्योकि अमितशाह की यूनिवर्सिटी उनको सुवाह शाम यही पढ़ती है! दलित जाति के उत्तपति और विकास पर कोई बात करना ही नहीं चाहता तो बहुसंख्यक दलित या बहुजन को कैसे पता चलेगा की वह मूलनिवासी हैं ! पहले सत्य को जानो, वोट बैंक के लालच में न दलित संगठन जाति की शुद्धता के विषय पर बात करना चाहते हैं और न गैर- दलित संगठन ! आम दलित कैसे मन ले कि वह मूल निवासी है ! वह अपनी जाति जानता है, अपनी जाति के नाम पर शर्मिंदा होना जानता है इसलिए अच्छे-अच्छे उपनामों के पीछे छिपा रहता है आप उसको कैसे समझाओगे कि वह मूल निवासी है जब तक उसको अपनी जाति का भूत भविष्य और वर्तमान स्पष्ट नहीं दिखाई देता है! पहले जातियों को जानो और मानो गौरव जगाओ समानता के स्तर तक लाओ जो समान स्तर के हो जाते हैं वह बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के जुड़ ही जाते हैं!
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