इंग्लैंड में किसान विद्रोह

इंग्लैंड में किसान विद्रोह

इंग्लैंड में वर्ष 1381 में हुआ किसान विद्रोह मध्यकालीन यूरोप का एक ऐतिहासिक विद्रोह था। इसकी जड़ें 1348-49 में फैले प्लेग में निहित थीं, जिसने इंग्लैंड की तकरीबन एक तिहाई आबादी को लील लिया था। इसके चलते वहां श्रमिकों का भारी अभाव हो गया था और मजदूरी की दरें काफी बढ़ गई थीं। 1351 ई. में ब्रिटिश पार्लियामेंट ने मजदूरी की दरों पर लगाम लगाने के लिए एक श्रमिक कानून पारित किया, जिससे वहां पर तमाम मजदूर वर्ग और खासकर किसानों में घोर असंतोष व्याप्त हो गया। इसके बाद जब आर्थिक दिक्कतों से जूझ रही ब्रिटिश सरकार ने 1381 में ‘पोल टैक्स’ (व्यक्ति कर) आरोपित किया तो किसान विद्रोह पर उतारू हो गए। विद्रोह की शुरुआत एसेक्स से हुई, लेकिन जल्द ही इसकी आंच केंट तक भी पहुंच गई, जहां पर वाट टायलर को इसका नेता चुना गया। इसी वजह से इसे ‘वाट टायलर का विद्रोह’ भी कहा जाता है। इसके अन्य नेताओं में जॉन बाल तथा जैक स्ट्रॉ जैसे नाम प्रमुख थे। जल्द ही इन विद्रोहियों ने कैंटरबरी को घेर लिया और लंदन की ओर बढ़े। हालांकि इंग्लैंड के तत्कालीन युवा शासक रिचर्ड (द्वितीय) ने युक्तिपूर्वक इस विद्रोह का शमन जरूर कर दिया, लेकिन माना जाता है कि इसके साथ ही मध्यकालीन इंग्लैंड में दासत्व के अंत की शुरुआत हो गई।

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