कच्चे शमशान और कब्रिस्तान का विवाद

कच्चे शमशान और कब्रिस्तान का विवाद

संक्षेप में कहूँ तो वह स्थान हजारो वर्ष तक कच्चा शमशान था इसलिए वहां मस्जिद बनाई गयी, उससे पहले वह भिक्षुओ का विहार था जहाँ हजारो भिक्षुओ का कत्लेआम किया गया था! नागापंथ और अघोरी ध्यान की जिस पद्दति का प्रयोग करते है वह बुद्ध की ध्यान पद्दति कयानुपशाना की पद्दति दसम मंस्विकर पब्बम के अंतर्गत आता है! जिसमें ध्यानी सड़ रही लाशो को देखकर काया की आसक्ति से मुक्त होने का प्रयास करता है! विवाद इस कारण उत्तपन हुआ क्योकि मुस्लिम लाशो को दफनाने पर जोर दे रहे थे! नागा और अघोरी लाशो को खुला रखना चाहते थे! मूलतः यह कच्चे शमशान और कब्रिस्तान का विवाद है जिसे षड्यंत्रकारियों ने राममंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद बना दिया है !

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