परिवार नाम की संस्था



आप बुरा मान जायेंगे इसलिए नहीं कहूँगा ! फिर भी स्मरण दिला दूं - कबीर ने कहा है साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप स्वभाव, सार-सार को गहि रहे थोथा देय उडाए! मित्र विरोध केवल विरोध के लिए नहीं होना चाहिए ! भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है! हर संस्कृति में कुछ अच्छाईयां हैं, मनुष्य और पशु समाज की भिन्नताओ के क्या अंतरिक कारण हैं, क्यों यह स्थापित हो पाए, उन मनो-वैज्ञानिक कारणों को नकारोगे तो परिवार नाम की संस्था को सिर्फ विरोध के कारण नष्ट कर दोगे !

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